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सकल आय गठन

सकल आय गठन

राष्ट्रीय आय की गणना की विधियाँ

स्वतंत्र भारत में 1949 में पी सी महालनोबिस की अध्यक्षता में राष्ट्रीय आय समिति का गठन किया गया। जिसमें राष्ट्रीय आय से संबंधित अपने दो रिपोर्ट प्रस्तुत की किंतु इसी बीच इस कार्य को ठीक से करने के लिए एक स्थाई संगठन स्थापित किया गया, जिसका नाम केंद्रीय सांख्यिकी संगठन है।इसकी स्थापना 1951 में की गई केन्द्रीय साख्यिकी संगठन साख्यिकी एवं कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय के अंतर्गत कार्य करता है।वर्तमान समय में भी यही संस्था राष्ट्रीय आय सम्बन्धी आंकड़े प्रस्तुत करती हैं।

‎चूंकि पी सी महालनोबिस का जन्म दिवस 29 जून को आता है अतः इस दिवस को राष्ट्रीय सकल आय गठन सांख्यिकी दिवस के रुप में मनाया जाता है।

राष्ट्रीय आय की माप(गणना) की विधि

भारत में राष्ट्रीय आय की माप के लिए उत्पादन विधि तथा आय विधि के मिश्रित रूप का प्रयोग किया जाता है। जबकि व्यय विधि का प्रयोग अत्यंत नगण्य होता है क्योंकि भारत में इसके पर्याप्त आंकड़े उपलब्ध नहीं है।

1. उत्पाद सकल आय गठन विधि (Value Added Method)

उत्पादन विधि में मुख्यतः तीन क्षेत्रो को सम्मिलित किया जाता है। प्राथमिक क्षेत्र,द्वितीयक क्षेत्र तथा तृतीय क्षेत्र। तथा इन तीनों क्षेत्रों से 1 वर्ष के भीतर उत्पादित वस्तुओं की मूल्य की गणना की जाती है इस विधि में। यहाँ प्राथमिक क्षेत्र में कृषि वानिकी, मत्स्य पालन, खनन को शामिल किया जाता है। इसका GDP में योगदान लगभग 14% होता है। द्वितीयक क्षेत्र में निर्माण एवं विनिर्माण में बिजली गैस एवं जलापूर्ति को शामिल किया जाता है। इसका GDP में योगदान लगभग 28% होता है। जबकि तृतीयक क्षेत्र के अन्तर्गत बीमा,बैंकिंग,व्यपार,होटल,परिवहन, संचार सेवा क्षेत्र इत्यादि को शामिल किया जाता है। इसका GDP में योगदान लगभग 58% होता है। सकल राष्ट्रीय उत्पाद (GNP) कहते हैं।

2. आय विधि (Income Method)

इस विधि में देश के विभिन्न वर्गों द्वारा अर्जित आय को जोड़ा जाता है। इस विधि के अंतर्गत राष्ट्रीय आय की गणना करते समय एक निश्चित दिए हुए वर्ष में विभिन्न सकल आय गठन क्षेत्रों जैसे मजदूरी एवं पारिश्रमिक,विदेशों से साधनों की शुद्ध आय,लाभांश,लगान और किराया,सरकारी उद्यमों के लाभ,अतिरिक्त लाभ,ब्याज,कर्मचारियों के कल्याण के लिए अंशदान,स्वनयुक्त (Self-Employed) आय इत्यादि का समग्र योग किया जाता है। इसे सकल राष्ट्रीय आय (GNI) कहते हैं।

3. व्यय विधि (Expenditure Method)

इस विधि के अंतर्गत किसी दिए हुए वर्ष में राष्ट्रीय आय की गणना करते समय उपभोग व्यय,निवेश व्यय,सरकारी व्यय तथा आयातों पर किया गया व्यय का समग्र योग किया जाता है। इसे सकल राष्ट्रीय व्यय (GNE) कहते हैं।

राष्ट्रीय आय एवं अन्य मानक

वस्तु और सेवाओं के समस्त मूल्य को प्रदर्शित करते हुए मुद्रा वर्तुल पथ पर गमन करती है। वस्तु और सेवाओं के समस्त मूल्यों का एक वर्ष के दौरान जो आंकलन करते हैं वह राष्ट्रीय आय कहलाता है। राष्ट्रीय आय को मापने के लिए मुख्यतः तीन विधियों का प्रयोग किया जाता है

सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में किसी घरेलू अर्थव्यवस्था के अंतर्गत एक वर्ष के दौरान अंतिम वस्तुओं और सेवाओं के समस्त उत्पादन की माप की जाती है लेकिन इसका संपूर्ण उत्पादन देश की जनता को प्राप्त नहीं हो सकता है। भारत में सर्वप्रथम राष्ट्रीय आय का आंकलन करने का श्रेय दादा भाई नौरोजी को जाता है , जिन्होंने 1868 में किया था। इनके बाद भी समय पर कई अर्थशास्त्रियों ने भारत की राष्ट्रीय आय का आंकलन किया। वर्तमान समय में राष्ट्रीय आय के आंकलन व अवमूल्यन का कार्य केन्द्रीय सांख्यिकीय कार्यक्रम मंत्रालय के केन्द्रीय सांख्यिकीय संगठन (CSO) के द्वारा किया जाता है।

राष्ट्रीय आय एवं अन्य मानक

राष्ट्रीय आय-किसी भी देश के उत्पादित उपयोग तथा उपभोक्ता को मिलने वाले आर्थिक लाभ के विषय में अध्ययन राष्ट्रीय आय एवं उत्पादन के अंतर्गत किया जाता है। अर्थव्यवस्था में वस्तुओं और सेवाओं के उत्पादन तथा उनमें होने वाली वृद्धि को राष्ट्रीय आय में रखा जाता है। राष्ट्रीय आय के तहत किसी भी देश की आर्थिक स्थिति का आंकलन किया जाता है।

नोट- भारत की राष्ट्रीय आय एवं प्रति व्यक्ति आय का अवलोकन सर्वप्रथम शिक्षा शास्त्री पारसी बुद्धिजीवी “ दादा भाई नौरोजी ‘‘ ने किया था। दादा भाई नौरोजी के अनुसार वर्ष 1868 में प्रति व्यक्ति आय 20 बताई गई थी।

राष्ट्रीय आय से अभिप्राय- एक राष्ट्र की एक वर्ष में आर्थिक क्रियाकलापों के फलस्वरूप उत्पादित अंतिम वस्तु एवं सेवा के मौद्रिक मूल्य के योग से है। इसके अंतर्गत सभी अंतिम वस्तुओं एवं सेवाओं के मूल्य को समायोजित किया जाता है। जो घरेलू सीमा अथवा उसके बाहर रहकर उत्पादित की गई है। इसके अंतर्गत विदेशों से अर्जित साधन आय को भी शामिल किया जाता है।

राष्ट्रीय आय लेखांकन- उत्पादन उपभोग वितरण के बारे में जो नियोजित रूप से लेखा-जोखा रखता है , उसे देश की राष्ट्रीय आय का लेखांकन कहा जाता है। राष्ट्रीय आय लेखांकन के अंतर्गत एक वित्तीय वर्ष में किसी देश की अर्थव्यवस्था के कुल आय को मापा जाता है। राष्ट्रीय आय लेखांकन का जन्मदाता अमेरिकी अर्थशास्त्री ‘‘ साइमन कुजनेट्स ‘‘ को माना जाता है।

साइमन कुजनेट्स को आर्थिक और अंतर्दृष्ट गहरा सामाजिक संरचना में शोध करने के लिए अर्थशास्त्र का नोबेल पुरस्कार 1971 में प्रदान किया गया।

साइमन कुजनेट्स का जन्म बेलारूस में हुआ था लेकिन उन्होंने बाद में अमेरिकी नागरिकता अपना ली थी।

· संयुक्त राष्ट्र संघ ने विभिन्न देशों की आर्थिक क्रियाकलापों के अध्ययन के लिए 1960 ईसवी से एक प्रमाणित राष्ट्रीय आय लेखा प्रणाली को विकसित किया था।

राष्ट्रीय आय लेखांकन में अन्तरः

किसी एक निश्चित वर्ष में उत्पादित अंतिम वस्तु एवं सेवाओं के कुल मौद्रिक मूल्य को राष्ट्रीय आय कहते हैं।

एक वित्तीय वर्ष में वस्तुओं के उत्पादन उपभोग एवं वितरण से संबंधित सांख्यिकी लेखा-जोखा है।

राष्ट्रीय आय , अर्थव्यवस्था की निरन्तर विकास का सूचित करता हैं

राष्ट्रीय आय लेखांकन के अंतर्गत अर्थव्यवस्था के विभिन्न क्षेत्रों की कार्यशक्ति को सूचित किया जाता है।

राष्ट्रीय आय में अर्थव्यवस्था का संक्षिप्त एवं सुव्यवस्थित चित्रण प्रस्तुत किया जाता है।

राष्ट्रीय आय लेखांकन में अर्थव्यवस्था की वृहद का सुचना , प्रस्तुत कि जाती है।

· भारतीय राष्ट्रीय आय की गणना केन्द्रीय सांख्यिकी संगठन के द्वारा की जाती है।

· भारत में राष्ट्रीय आय समिति का गठन सर्वप्रथम 1949 में किया गया था जिसे अध्यक्ष पी . सी . महालनोबिस थे जबकि , आई . वी . राव एवं गाडगिल इसके सदस्य थे।

· वर्तमान समय में राष्ट्रीय आय के अनुमान लगाने का आधार वर्ष 2011-12 है इस वर्ष को 30 जनवरी , 2015 से लागू किया।

· आधुनिक राष्ट्रीय लेखा प्रणाली के जनक ग्रेगरी किंग को माना जाता है।

§ किसी देश के आर्थिक विकास का सही सूचक स्थिर कीमत पर राष्ट्रीय आय का आकलन है।

राष्ट्रीय आय निश्चित वर्ष में उस देश द्वारा उत्पादित सभी वस्तुओं तथा सेवाओं का कुल मौद्रिक मूल्य है। राष्ट्रीय आय की वृद्धि से किसी भी देश की प्रगति को जानने में सहायता प्राप्त होती है।

एक देश को एक निश्चित वर्ष के विभिन्न आर्थिक गतिविधियों जिसके अंतर्गत मजदूरीए ब्याज , किराया मुनाफा , सभी संसाधनों के लिए किये गये भुगतान को शामिल किया जाता है , कुल जितने का लेन-देन मुनाफा

आदि होता है वह राष्ट्रीय कहलाता है।

राष्ट्रीय आय को गिनने की विधि को राष्ट्रीय सकल आय गठन आय लेखा कहा जाता है।

राष्ट्रीय आय = C+1G-(X-M)

राष्ट्रीय आय = उपभोग व्यय़़ + निवेश व्यय + सरकारी व्यय - मशीनों की घिसावट व्यय + निर्यात एवं आयात के मूल्यों का अंतर

§ राष्ट्रीय आय से संबंधित मुख्य तथ्य

1. राष्ट्रीय आय को मुद्रा के रूप में मापा जाता है।

2. भारत में सर्वप्रथम राष्ट्रीय आय का अवलोकन दादा भाइ नौरोजी ने 1868 में किया था।

3. अमेरिकी अर्थशास्त्री एस . फिशर ने वर्ष 1911 में राष्ट्रीय आय का अवलोकन किया एवं प्रति व्यक्ति आय 49 बताया था।

4. भारत में राष्ट्रीय आय का आकलन केन्द्रीय सांख्यिकीय संगठन के द्वारा किया जाता है। C.S.O केंद्रीय सांख्यिकीय संगठनद्ध स्थापना 2 मई , 1951 को की गई , जिसका मुख्यालय नई दिल्ली में है। प्रतिवर्ष राष्ट्रीय सांख्यिकी दिवस 29 जून को पी . सी . महालनोबिस के जन्मदिवस के उपलक्ष्य में मनाया जाता है।

5. राष्ट्रीय सांख्यिकी आयोग को सन् 2005 में पूर्णकालिक आयोग के रूप में बदल दिया गया जिसके पहले अध्यक्ष सुरेश तेन्दुलकर को बनाया गया।

राष्ट्रीय आय में सम्मलित तथ्य

1. राष्ट्रीय आय में वस्तुओं एवं सेवाओं के मूल्य को शामिल किया जाता है न कि मध्यवर्ती वस्तुओं के मूल्य को।

2. पुरानी वस्तुओं के मूल्य को राष्ट्रीय आय में शामिल नहीं किया जाता है।

3. राष्ट्रीय आय से घरेलू सेवाओंय जैसे- कपड़ा धोना , खाना बनाना आदि को शामिल नहीं किया जाता है।

4. भारतीय निवासियों द्वारा विदेशों में उत्पादित वस्तुओं एवं सेवाओं के मूल्य को राष्ट्रीय आय के अंतर्गत शामिल किया जाता है।

5. पेंशन भत्ता जैसे हस्तांतरण भुगतान को राष्ट्रीय आय में शामिल नहीं किया जाता है।

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आदि कुछ धन, धर्मार्थ संस्थाओं को दान के संबंध में कटौती

80 जी. (1) एक निर्धारिती की कुल आय की गणना में, के अनुसार, वहाँ कटौती की जाएगी और इस खंड, के बराबर राशि के प्रावधानों के अधीन,

(क) जहां निर्धारिती. एक कंपनी, पचास फीसदी है, और

(ख) किसी अन्य निर्धारिती के मामले में, पचपन फीसदी., उपधारा में निर्दिष्ट रकम की कुल के (2).

(2) उपधारा में निर्दिष्ट रकम (1) अर्थात्, निम्न हो जाएगा:

(एक) को दान के रूप में पिछले वर्ष में निर्धारिती द्वारा भुगतान किसी भी रकम

(I) राष्ट्रीय रक्षा कोष केन्द्र सरकार द्वारा स्थापित; या

(Ii) जवाहरलाल नेहरू मेमोरियल फंड अगस्त, 1964 के 17 वें दिन पर आयोजित बैठक में राष्ट्रीय समिति द्वारा अपनाई ट्रस्ट की घोषणा की डीड में निर्दिष्ट; या

(Iii) प्रधानमंत्री की सूखा राहत कोष; या

(Iv) किसी अन्य फंड या किसी भी संस्था जो इस खंड पर लागू करने के लिए: या

(V) सरकार या किसी धर्मार्थ प्रयोजन के लिए उपयोग किया जा करने के लिए किसी भी स्थानीय प्राधिकारी,;

(ख) सरकारी राजपत्र में केन्द्र सरकार द्वारा अधिसूचित किया है के रूप में इस तरह के किसी मंदिर, मस्जिद, gurd-Wara, चर्च या अन्य जगह की मरम्मत या मरम्मत के लिए दान के रूप में पिछले वर्ष में निर्धारिती द्वारा भुगतान किसी भी रकम ऐतिहासिक का होना , archaeoligical या कलात्मक महत्व या किसी राज्य या राज्य भर में यश की सार्वजनिक पूजा की एक जगह हो.

(3) कोई कटौती उपधारा में निर्दिष्ट रकम की कुल (2) कम से कम दो सौ और पचास रुपये है (1) यदि उप - धारा के तहत अनुमति दी जाएगी.

(4) उप - धारा के तहत कटौती (1) उप खंड (iv) और (v) (क) खंड की और में खंड (ख में निर्दिष्ट रकम की कुल के ऐसे भाग के संबंध में अनुमति नहीं दी जाएगी ) की उपधारा (2) के रूप में दस प्रतिशत से अधिक है. सकल कुल आय का (आयकर इस अधिनियम के किसी प्रावधान के तहत और निर्धारिती इस अध्याय के किसी अन्य प्रावधान के तहत छूट पाने का अधिकार है जिनके संबंध में किसी भी राशि से देय नहीं है जिस पर उसके किसी हिस्से से कम के रूप में), जो भी कम हो या दो लाख रुपए,:

इस तरह कुल उप खंड के खंड में निर्दिष्ट किसी दान (ख) (2) और इस तरह कुल इस उपधारा में निर्दिष्ट दो लाख रुपये की सीमा से अधिक है, तो इस तरह के सीमा उस हिस्से को कवर करने के लिए उठाया जाएगा, जहां बशर्ते कि पूर्वोक्त, या पांच लाख रुपये के रूप में कम के रूप में इसलिए उठाया सीमा निर्धारिती की सकल कुल आय का प्रतिशत दस से अधिक नहीं होगी, हालांकि, कि इस तरह के कुल और कहा सीमा के बीच के अंतर के बराबर है, इसलिए जो पूर्वोक्त दान की , इनमें से जो भी कम है.

(5) इस अनुभाग में उपखंड (चतुर्थ) खंड (क) की उपधारा (2), यह एक धर्मार्थ प्रयोजन के लिए भारत में स्थापित किया है और तभी यह पूरा करता है अगर में निर्दिष्ट किसी संस्था या फंड को दान करने के लिए लागू होता है अर्थात् निम्न स्थितियों,:

संस्था या फंड ऐसी आय वर्गों 11 और 12 या खंड (22) या खंड के प्रावधानों (22A) के तहत अपनी कुल आय में शामिल किए जाने के लिए उत्तरदायी नहीं होगा कोई आय, निकला है जहां (मैं) * [या खंड (23)] की धारा 10 ;

(Ii) संस्था या फंड का गठन किया है, जिसके तहत साधन नहीं है, या संस्था या फंड संचालन नियम, स्थानांतरण या आवेदन पूरे के किसी भी समय या की आय या संपत्ति के किसी भी हिस्से के लिए कोई प्रावधान शामिल नहीं है एक धर्मार्थ उद्देश्य के अलावा और किसी भी उद्देश्य के लिए संस्था या फंड,

(Iii) संस्था या फंड किसी विशेष धार्मिक समुदाय या जाति के लाभ के लिए होने के लिए व्यक्त नहीं कर रहा है;

(Iv) संस्था या फंड अपने recepits और व्यय की नियमित खातों का रखरखाव; और

(V) संस्था या फंड या तो एक पब्लिक चैरिटेबल ट्रस्ट के रूप में गठन किया जाता है या सोसायटी पंजीकरण अधिनियम के तहत पंजीकृत है, 1860 (1860 का 21), या भारत के किसी भी हिस्से में या धारा 25 के तहत बल में है कि अधिनियम के संगत किसी भी कानून के तहत कंपनी अधिनियम, 1956 की (1956 का 1), या एक विश्वविद्यालय में कानून द्वारा स्थापित, या सरकार द्वारा या द्वारा मान्यता प्राप्त किसी भी अन्य शैक्षिक संस्था के एक विश्वविद्यालय में कानून द्वारा स्थापित, या किसी भी विश्वविद्यालय में कानून द्वारा स्थापित करने के लिए संबद्ध * [या है के खंड (23) के प्रयोजनों के लिए केन्द्र सरकार द्वारा अनुमोदित संस्था धारा 10 ,] या सरकार या किसी स्थानीय प्राधिकारी द्वारा पूर्ण या आंशिक रूप से वित्तपोषित एक संस्था है.

स्पष्टीकरण 1: अनुसूचित जातियों, पिछड़े वर्गों, अनुसूचित जनजाति या महिलाओं और बच्चों के के लाभ के लिए स्थापित एक संस्था या फंड एक संस्था या फंड अर्थ के भीतर एक धार्मिक समुदाय या जाति के लाभ के लिए होने के लिए व्यक्त करने वाला नहीं समझा जाएगा खंड (iii) की उपधारा (5). ,

स्पष्टीकरण 2: शंकाओं को दूर करने के लिए यह एतद्द्वारा निर्धारिती जो उप - धारा (5) या पर महज इनकार नहीं किया जा होगा लागू होता है के लिए एक संस्था या फंड में किए गए दान के संबंध में एक कटौती के हकदार है जो कि घोषित किया जाता है अर्थात् निम्न आधार की दोनों,:

दान करने के बाद, संस्था या फंड की आय का कोई हिस्सा होने के कारण धारा 11 के प्रावधान में से किसी के साथ गैर अनुपालन को कर के दायरे में हो गया है, कि (मैं) 6 [धारा 12 या धारा 12A]

(Ii) खंड के अधीन उप - धारा (ग) (1) के खंड 13 के तहत छूट धारा 11 6 [या धारा 12 ] संदर्भित किसी भी निवेश से इसे करने के लिए उत्पन्न होने वाले किसी भी आय के संबंध में संस्था या फंड के लिए इनकार कर दिया है उप खंड के खंड (ज) (2) के में करने के लिए धारा 13 एक चिंता में यह द्वारा निवेश फंडों की कुल उक्त खंड (ज) में निर्दिष्ट है कि जहां चिंता की राजधानी के पांच प्रतिशत, से अधिक नहीं है .

स्पष्टीकरण 3: इस खंड में, "धर्मार्थ उद्देश्य 'किसी भी उद्देश्य पूरा या एक धार्मिक प्रकृति की है जो की काफी हद तक पूरे शामिल नहीं है.

* [स्पष्टीकरण 4: इस खंड के प्रयोजनों के लिए, के खंड (23) के प्रयोजनों के लिए केन्द्र सरकार ने मंजूरी दे दी एक संघ धारा 10 भी एक संस्था होना समझा जाएगा, और हर संस्था या संस्था को केंद्र सरकार द्वारा मंजूरी दी उक्त खंड के प्रयोजनों के लिए एक धर्मार्थ प्रयोजन के लिए भारत में स्थापित एक संस्था होना समझा जाएगा. "]

* वर्ग ब्रैकेट में शब्दों वित्त अधिनियम, 1973 से प्रभावी द्वारा डाला गया है 1974/01/04.

* वर्ग ब्रैकेट में शब्दों वित्त अधिनियम, 1973 से प्रभावी द्वारा डाला गया है 1974/01/04.

बोर्ड की आय

बोर्ड की आय का मुख्य स्त्रोत बोर्ड शुल्क अर्थात विपणन विकास निधि है। मण्डी अधिनियम की धारा 43 के अंतर्गत प्रत्येक मण्डी समिति बोर्ड को अपनी सकल प्राप्तियों मण्डी फीस + अनुज्ञप्ति फीस का एक निर्धारित प्रतिशत जैसा कि राज्य शासन द्वारा घोषित किया गया हो बोर्ड शुल्क के रुप में मासिक आधार पर भुगतान करती है। यह राशि विपणन विकास निधि कहलाती है। राज्य शासन की अधिसूचना क्रमांक डी 15-2000-चौदह-3 दिनांक 04 अप्रेल 2003 से बोर्ड शुल्क की जो दरें प्रभावशील की गई हैं वे निम्नानुसार हैं |

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