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बचत योजनाएं

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20 राष्ट्रीय बचत योजना या एक वार्षिकी योजना के भुगतान के तहत जमा के संबंध में [कटौती.

80CCA. (1) कहाँ एक निर्धारिती, किया जा रहा है,

(एक) एक व्यक्ति, या

(ख) एक हिंदू अविभाजित परिवार, या

(ग) व्यक्तियों की एक संस्था या किसी भी मामले में, मिलकर व्यक्तियों की एक संस्था, केवल गोवा और दादरा और नगर ​​हवेली तथा दमन का केंद्र शासित प्रदेशों की राज्य में बल में संपत्ति के समुदाय की प्रणाली द्वारा संचालित पति और पत्नी की और , दीव

पिछले में है साल

(मैं), शासकीय राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, (राष्ट्रीय बचत योजना के रूप में भेजा इस खंड में इसके बाद) इस संबंध में निर्दिष्ट कर सकता है जो केन्द्रीय सरकार ऐसी योजना के अनुसार किसी भी राशि जमा; या

(II), सरकारी राजपत्र में अधिसूचना द्वारा विनिर्दिष्ट केन्द्रीय सरकार के रूप में जीवन बीमा निगम की ऐसी वार्षिकी योजना के लिए एक अनुबंध लागू करने के लिए या बल में रखने के लिए किसी भी राशि का भुगतान

टैक्स के लिए अपनी आय प्रभार्य से बाहर है, वह करने के लिए, और इस विषय के अनुसार, इस धारा के प्रावधानों, (ब्याज या बोनस को छोड़कर जमा या भुगतान की गई राशि का पूरी की उसकी कुल आय की गणना में कटौती की अनुमति दी जाएगी पिछले साल में बीस हजार रुपए की राशि से अधिक नहीं है के रूप में निर्धारिती का खाता यदि कोई हो) के लिए श्रेय दिया उपार्जित:

"तीस हजार रुपए" प्रतिस्थापित किया गया था शब्द "बीस हजार रुपए," शब्दों के लिए अगर के रूप में अप्रैल, 1989 और बाद के मूल्यांकन वर्षों बचत योजनाएं के 1 दिन शुरू निर्धारण वर्ष के संबंध में, इस उपधारा के प्रभावी होंगे बशर्ते कि .

(2) जहां किसी भी राशि

(एक), एक कटौती (1) एक साथ किसी भी पिछले साल में पूरे या भाग में वापस ले लिया है इस तरह की राशि पर अर्जित ब्याज के साथ उप - धारा के तहत अनुमति दी गई है जिनके संबंध में राष्ट्रीय बचत योजना के तहत निर्धारिती के ऋण के लिए खड़े या

(ख), किसी भी पिछले वर्ष में जीवन बीमा निगम की वार्षिकी योजना के अनुसार पॉलिसी या वार्षिकी या बोनस के रूप में के आत्मसमर्पण के कारण प्राप्त होता है

राशि के पूरे के बराबर राशि (क) खंड में निर्दिष्ट या खंड (ख) जैसा भी मामला हो इस तरह की वापसी, या बनाया है, जिसमें कि पिछले वर्ष की निर्धारिती की आय, राशि होने के लिए समझा जाएगा प्राप्त होता है, और, तदनुसार, कि पिछले वर्ष की आय के रूप में कर के दायरे में होगी.

स्पष्टीकरण मैं के लिए शंकाओं को दूर करने, यह एतद्द्वारा राष्ट्रीय बचत योजना के तहत बनाई गई जमा राशि पर ब्याज ढंग से सिवाय और उपधारा में निर्दिष्ट सीमा तक कर के दायरे में नहीं होगा कि घोषित किया जाता है (2).

स्पष्टीकरण द्वितीय. के लिए इस खंड के प्रयोजन, "जीवन बीमा निगम 'उप - धारा (8) धारा 80 सी (क) खंड के रूप में एक ही अर्थ होगा.]

प्र.20. वित्त अधिनियम, 1988 से प्रभावी द्वारा प्रतिस्थापित 1988/01/04. पहले अपने प्रतिस्थापन के लिए, अनुभाग 80CCA, 1988/01/04 से प्रभावी वित्त अधिनियम, 1987, द्वारा सम्मिलित रूप में नीचे के रूप में पढ़ें:

. राष्ट्रीय बचत योजना के तहत जमा के संबंध में "80CCA कटौती -. (1) कहाँ एक निर्धारिती, किया जा रहा है,

(एक) एक व्यक्ति, या

(ख) एक हिंदू अविभाजित परिवार, या

(ग) व्यक्तियों की एक संस्था या केवल पति और दादरा और नगर ​​हवेली और गोवा, दमन और दीव के संघ राज्य क्षेत्रों में बल में संपत्ति के समुदाय की प्रणाली द्वारा संचालित पत्नी का, या तो मामले में, मिलकर व्यक्तियों की एक संस्था.

पिछले वर्ष में सरकारी राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, (राष्ट्रीय बचत योजना के रूप में भेजा इस खंड में इसके बाद) इस संबंध में निर्दिष्ट कर सकता है जो केन्द्रीय सरकार ऐसी योजना के अनुसार किसी भी राशि पर कर लगाने उसकी आय प्रभार्य के बाहर जमा हो गया है , वह करने के लिए, और इस विषय के अनुसार, इस धारा के प्रावधानों, अर्जित ब्याज को छोड़कर जमा (का इतना के पचास प्रतिशत के बराबर राशि के बारे में उनकी कुल आय की गणना में कटौती की अनुमति दी जाए और करने के लिए श्रेय दिया जाएगा निर्धारिती का खाता) के रूप में पिछले साल में बीस हजार रुपए की राशि से अधिक नहीं है.

(2) जहां एक कटौती (1) एक साथ में पूरे या हिस्से में वापस ले लिया है इस तरह की राशि पर अर्जित ब्याज के साथ उप - धारा के तहत अनुमति दी गई है जिनके संबंध में राष्ट्रीय बचत योजना के तहत निर्धारिती के ऋण के लिए खड़े किसी भी राशि किसी भी पिछले साल, तो निकाली गई राशि का पचास फीसदी के बराबर रकम इस तरह की वापसी से बना है और, तदनुसार, इस बात का आय के रूप में कर के दायरे में होगी, जिसमें कि पिछले वर्ष की निर्धारिती की आय होना समझा जाएगा पिछले वर्ष.

स्पष्टीकरण: शंकाओं को दूर करने के लिए यह एतद्द्वारा राष्ट्रीय बचत योजना के तहत बनाई गई जमा राशि पर ब्याज ढंग से और उपधारा में निर्दिष्ट सीमा तक छोड़कर कर के दायरे में नहीं होगा कि घोषित किया जाता है (2) ".

छोटी बचत योजनाएं

यकीनन इस समय देश में छोटी बचत करने वाले करोड़ों लोग छोटी बचत योजनाओं पर मिलने वाली कम ब्याज दर के कारण बढ़ती महंगाई की चुनौती का सामना कर रहे हैं। यह उम्मीद की जा रही थी कि जिस तरह पिछले दो-तीन महीनों में स्थायी जमा (एफडी) के साथ-साथ अन्य ब्याज दरों में वृद्धि हो चुकी है, उसी तरह जुलाई से सितंबर 2022 के लिए छोटी बचत योजनाओं पर मिलने वाली ब्याज दरों में बढ़ोतरी की जाएगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ है। जब तक महंगाई का दौर बना रहे, तब तक छोटी बचत योजनाओं पर ब्याज दर में कुछ वृद्धि कर दी जाए, तो एक बड़े वर्ग को राहत मिल सकती है।

गौरतलब है कि रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध की वजह से कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और वस्तुओं की आपूर्ति बाधित होने से कीमतों में तेज वृद्धि से पूरी दुनिया के साथ-साथ भारत में भी महंगाई तेजी से बढ़ रही है। मई, 2022 में थोक महंगाई दर 15.88 फीसदी और खुदरा महंगाई दर 7.04 फीसदी के चिंताजनक स्तर पर पहुंच गई। ऐसे में रिजर्व बैंक महंगाई को नियंत्रित करने के लिए अब तक 0.90 फीसदी रेपो दर बढ़ा चुका है, बैंक एफडी पर 0.50 फीसदी से अधिक ब्याज दर बढ़ा चुके हैं, बॉन्ड पर यील्ड भी बढ़ता जा रहा है, ऋण महंगे हो रहे हैं, ऋण पर ज्यादा किस्त और ज्यादा ब्याज चुकाना पड़ रहा है और कर्ज के भुगतान की किस्त चूक में भी बढ़ोतरी हो रही है।

उल्लेखनीय है कि पिछले दो वर्षों से छोटी बचत योजनाओं पर ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं हुआ है। यदि हम छोटी बचत योजनाओं पर मिलने वाली मौजूदा ब्याज दरों को देखें, तो पाते हैं कि इस समय बचत खाता पर चार फीसदी, एक से तीन साल की एफडी पर 5.5 फीसदी, पांच साल की एफडी पर 6.7 फीसदी, वरिष्ठ नागरिक बचत योजना पर 7.4 फीसदी, एमआईएस पर 6.6 फीसदी, एनएससी पर 6.8 फीसदी, पीपीएफ पर 7.1 फीसदी, किसान विकास पत्र पर 6.9 फीसदी, सुकन्या समृद्धि योजना पर 7.6 फीसदी ब्याज दर देय है। यह भी उल्लेखनीय है कि केंद्र सरकार ने वर्ष 2021-22 के लिए कर्मचारी भविष्य निधि (ईपीएफ) पर 8.1 फीसदी ब्याज दर की अनुमति दी है। बचत योजनाएं यह चार दशक से अधिक समय में सबसे कम ब्याज दर है। इसका करीब पांच करोड़ ईपीएफ सदस्यों पर असर पड़ा है।

निस्संदेह पिछले दो वर्षों में कोविड-19 की आर्थिक चुनौतियों से लेकर अब तक देश में आम आदमी, नौकरीपेशा वर्ग और निम्न मध्यम वर्ग के सामने एक बड़ी चिंता उनकी छोटी बचत योजनाओं पर ब्याज दर कम रहने की है। अपनी सामाजिक प्रतिष्ठा और जीवन स्तर हेतु लिए गए सबसे जरूरी हाउसिंग लोन, ऑटो लोन, कन्ज्यूमर लोन आदि को चुकाने के लिए अधिक ब्याज व किस्तों की राशि बचत योजनाएं में वृद्धि से लोगों की चिंताएं बढ़ गई हैं।

वस्तुत: देश में बचत की प्रवृत्ति के लाभ न केवल कम आय वर्ग के परिवारों के लिए हैं, वरन पूरे समाज व अर्थव्यवस्था के लिए भी हैं। अब भी देश में बड़ी संख्या में लोगों को सामाजिक सुरक्षा (सोशल प्रोटेक्शन) की छतरी उपलब्ध नहीं है। इतना ही नहीं बचत योजनाओं पर मिलने वाली ब्याज दरों पर देश के उन तमाम छोटे निवेशकों का दूरगामी आर्थिक प्रबंधन निर्भर होता हैं, जो अपनी छोटी बचतों के जरिये जिंदगी के कई महत्वपूर्ण काम निपटाने की व्यवस्था सोचे हुए हैं। मसलन, बिटिया की शादी, सामाजिक रीति-रिवाजों की पूर्ति, बच्चों की पढ़ाई और सेवानिवृत्ति के बाद का जीवन। छोटी बचत योजनाएं रिटायर हो चुके और जमा पर मिलने वाले ब्याज पर निर्भर बुजुर्ग पीढ़ी का सहारा बनती हैं।करीब 14 वर्ष पूर्व 2008 की वैश्विक मंदी का भारत पर कम असर होने का एक प्रमुख कारण भारतीयों की संतोषप्रद घरेलू बचत की स्थिति को माना गया था। फिर 2020 में महाआपदा कोविड-19 से जंग में भारत के लोगों की घरेलू बचत विश्वसनीय हथियार के रूप में दिखाई दी। नेशनल सेविंग्स इंस्टीट्यूट (एनएसआई) द्वारा भारत में निवेश की प्रवृत्ति से संबंधित रिपोर्ट में कहा गया है कि जहां देश के लोगों के लिए छोटी बचत योजनाएं लाभप्रद हैं, वहीं इनका बड़ा निवेश अर्थव्यवस्था के लिए भी लाभप्रद है। क्या सरकार इस पर गौर करेगी?

घटती जाती ब्याज दर तो लघु बचत कितनी कारगर

एक तरफ बैंकों में जमा पर ब्याज दर घटती जा रही है, दूसरी ओर पीएमसी बैंक जैसों के ढहने की खबरें आती हैं। शेयर बाजारों में जारी अनिश्चितता के कारण म्युचुअल फंड भी बेहतर रिटर्न नहीं दे पा रहे हैं। ऐसे में अपनी बचत को लेकर चिंतित लोग कम रिटर्न के बावजूद लघु बचत योजनाओं पर ज्यादा ऐतबार कर रहे हैं। हालांकि बचत योजनाओं की दरें हर तीन महीने में बदलती हैं। पर सितंबर तिमाही में थोड़ी से घटने के बाद सरकार ने इस साल अक्टूबर से दिसंबर तक की तिमाही के लिए इन दरों में कोई कटौती नहीं की है। मौजूदा आर्थिक हालात में इन योजनाओं के निवेशकों के लिए यह बहुत बड़ी राहत है। सॉवरिन गारंटी के कारण लघु बचत योजनाएं आम निवेशक के लिए सुरक्षित विकल्प के तौर पर उभरी हैं।

बिजनेस स्टैंडर्ड ने कुछ समय पहले खबर छापी थी कि लघु बचत योजनाओं में इस साल अप्रैल और जुलाई के बीच निवेश 37 प्रतिशत बढ़ा है। इसकी वजह यह कि मौजूदा हालात में निवेशक प्रतिफल की गारंटी वाली योजनाओं में दिलचस्पी दिखा रहे हैं। इक्विटी म्युचुअल फंडों के प्रतिफल में गिरावट के कारण इन योजनाओं में प्रतिफल अब ज्यादा आकर्षक हो गया है। फिर भी, निवेशकों को दीर्घावधि नजरिया अपनाना चाहिए और कुछ अतिरिक्त सावधानियों बचत योजनाएं के साथ ही इन योजनाओं में दांव लगाना चाहिए।

लघु बचत योजनाएं अवधि के हिसाब से प्रतिफल मुहैया कराती हैं। आप एक, दो, तीन और पांच साल के लिए डाकघर की सावधि जमाओं में निवेश कर सकते हैं। राष्ट्रीय बचत पत्र (एनएससी) पांच साल के लिए और किसान विकास पत्र (केवीपी) 113 महीने के लिए जारी किए जाते हैं। सार्वजनिक भविष्य निधि (पीपीएफ) की अवधि 15 वर्ष की है और सुकन्या समृद्घि योजना (एसएसवाई) में लड़की की उम्र 18 साल हो जाने के बाद ही पहली निकासी की अनुमति है। जो निवेशक एक से तीन वर्ष की संक्षिप्त अवधि चाहते हैं, वे सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की सावधि जमाओं पर विचार कर सकते हैं। ये जमाएं बेहतर प्रतिफल दर मुहैया कराती हैं और इनमें जोखिम भी कम होता है।

जिनको पांच साल से ज्यादा की अवधि के लिए निवेश करना है, उनको इक्विटी और निश्चित आय वाली योजनाओं में निवेश करना चाहिए। इनमें छोटी बचत योजनाएं भी शामिल हैं। जब निवेश अवधि पांच साल से अधिक हो तो आपके पोर्टफोलियो का ज्यादा हिस्सा इक्विटी या शेयरों सेे जुड़ा होना चाहिए। लंबी अवधि के दौरान इक्विटी से जुड़े उतार-चढ़ाव का असर कम हो जाता है और प्रतिफल में सुधार आता है। जर्मिनेट वेल्थ सॉल्युशंस के संस्थापक एवं मैनेजिंग पार्टनर संतोष जोसफ कहते हैं, 'जब आप लंबी अवधि के लिए निवेश कर रहे हों तो मुद्रास्फीति से ज्यादा रिटर्न देने वाली योजनाओं को अपनाना चाहिए जो अच्छा प्रतिफल देती हों। निवेशक के जोखिम प्रोफाइल के आधार पर पोर्टफोलियो में इक्विटी और इक्विटी म्युचुअल फंडों के साथ-साथ लघु बचत योजनाओं को भी शामिल किया जाना चाहिए। यहां तक कि 20 साल बाद के लक्ष्य के हिसाब से बचत करने वाले कई निवेशक इक्विटी में अपना पूरा यानी 100 प्रतिशत पैसा नहीं लगाना चाहते। वे इक्विटी और डेट के लिए 80:20 या 75:25 आवंटन अनुपात को ज्यादा ठीक समझते हैं। निवेशक ऐसे पोर्टफोलियो में निश्चित आय के हिस्से के लिए पीपीएफ जैसी लघु बचत योजनाओं को अपना सकते हैं।'

छोटी बचत योजनाएं तुरंत नकदी के पैमाने अव्वल नहीं मानी जातीं। इनकी तुलना में शेयर और म्युचुअल फंड जैसे विकल्प ऐसे होते हैं जिनको तुरंत बेच पैसा पाया जा सकता है। हालांकि डाकघर की योजनाओं में आंशिक निकासी के लिए कुछ प्रावधान होते हैं। उदाहरण के लिए, पीपीएफ में आप पांच साल बाद रकम निकाल सकते हैं। वैलिडस वेल्थ में मुख्य निवेश अधिकारी राजेश चेरुवु कहते हैं, 'लघु बचत योजनाएं काफी हद तक ऐसी होती हैं जिनसे तुरंत नकदी नहीं मिल सकता। इन योजनाओं में निवेश तभी करें जब आपको इनकी लॉक-इन अवधि से बहुत दिक्कत नहीं हो।'

श्यामला गोपीनाथ समिति की सिफारिशों के आधार पर सरकार हर तिमाही में लघु बचत योजनाओं पर ब्याज दरों की समीक्षा करती है। यदि दरों में कमी की जाती है तो पीपीएफ और एसएसवाई के मामले में मौजूदा और आगामी निवेश पर देय दर कम हो जाती है। पिछले कु सालों में ब्याज दरों में कमी आई है। इस साल 28 जून को सरकार ने सभी छोटी बचत योजनाओं पर ब्याज दरों में 10 आधार अंक तक की कटौती की थी। जोसफ कहते हैं, 'दरों में कमी इन योजनाओं में सबसे बड़ा जोखिम है। इस समय पीपीएफ की दर 7.90 प्रतिशत है जो कई दशकों का बचत योजनाएं निचला स्तर है। इसमें और कमी आ सकती है।' जहां सरकार पर निवेशकों की उम्मीदों का खयाल रखने का दबाव है, वहीं वह ऐसे परिवेश में ब्याज दरें ऊंची नहीं रख सकती जब दुनिया भर में इनमें गिरावट आ रही हो, क्योंकि ऐसा करने से उसकी वित्तीय स्थिति पर असर पड़ेगा।

ज्यादातर लघु बचत योजनाओं से प्राप्त ब्याज की आय को प्राप्तकर्ता की आय में जोड़ा जाता है और इन पर मामूली दर से कर लगता है। पीपीएफ और एसएसवाई के मामले में ऐसा नहीं है। इन पर ब्याज आय कर-मुक्त है। कर प्रावधानों के कारण 30 प्रतिशत कर दायरे में आने वाले कई लोग पीपीएफ को छोड़कर दूसरी छोटी बचत योजनाओं में निवेश करने से परहेज करते हैं। लेकिन इनमें से कई योजनाएं कम कर दायरे वाले लोगों के लिए काफी मुनासिब हैं।

आयकर अधिनियम की धारा 80सी के तहत इनमें 1.5 लाख रुपये तक की कटौती की अनुमति है। पीपीएफ, एसएसवाई सभी धारा 80सी के लाभ के दायरे में शामिल हैं। एकमात्र समस्या यह है कि क्या निवेशक इस लाभ का वास्तविक फायदा उठाने में सक्षम होंगे, क्योंकि कई अन्य योजनाएं भी उपलब्ध हैं।

पीपीएफ ईईई (एक्जेम्प्ट-एक्जेम्प्ट-एक्जेम्प्ट) कर श्रेणी में आती है और लघु छोटी बचत योजनाओं में एक अच्छा विकल्प है। सेवानिवृत्ति, बच्चों की शिक्षा और शादी जैसे लक्ष्यों के लिए लंबी अवधि का पोर्टफोलियो तैयार करने वाले लोग इसे अपने निश्चित आय आय आवंटन के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं। आकर्षक प्रतिफल मुहैया कराने वाली अन्य दो योजनाएं खास उपयोगकर्ताओं पर केंद्रित हैं। वरिष्ठ नागरिक बचत योजना का प्रतिफल 8.6 प्रतिशत है और इसका इस्तेमाल सेवानिवृत्ति के बाद नियमित आय के लिए किया जा सकता है। याद रखें कि ब्याज हर तिमाही में चुकाया जाता है। 8.4 प्रतिशत के सालाना प्रतिफल के साथ एसएसवाई उन लोगों के लिए बेहतर विकल्प है जो अपनी बेटी की शिक्षा या शादी के लिए बचत करना चाहते हैं। जहां तक अन्य योजनाओं का सवाल है तो निवेश का निर्णय लेने से पहले दूसरे निश्चित आय विकल्पों (बैंक सावधि जमा और डेट फंड आदि) के साथ कर-बाद प्रतिफल की तुलना करें। कुल मिलाकर, लघु बचत योजनाओं में निवेश अपने जोखिम प्रोफाइल, निवेश की अवधि और लक्ष्य को ध्यान में रखकर करें। जोसफ कहते हैं, 'डेट में निवेश की संभावना तलाश रहे और निश्चित अवधि के लिए रकम फंसाने वाले निवेशक इन योजनाओं पर विचार कर सकते हैं।' वह कहते हैं कि लेकिन सारी ही राशि एक ही जगह नहीं डाल देनी चाहिए। इनमें रिटर्न कम ज्यादा होता रह सकता है और बहुत संभव है कि लंबी अवधि में इनमें से कई मुद्रास्फीति को थोड़ी सी ही मात दे पाएं।

Post Office Scheme: पोस्ट ऑफिस की ये 9 योजनाएं हैं बेहद खास, आप भी उठाएं इनका लाभ, जानिए कैसे

post office scheme

अगर आप सचमुच अपने आने वाले कल को सुरक्षित और आर्थिक रूप से मज़बूत करना चाहते हैं तो यह ख़बर आपके लिए है। पोस्ट ऑफिस द्वारा पेश की जा रही कुछ बेहतरीन बचत योजनाएं ( savings schemes) जिसमें आप निवेश कर अच्छा रिटर्न प्राप्त कर सकते है। तो आइये जानते हैं पोस्ट ऑफिस की ये सेविंग स्कीम के बारे में और कैसे आप इसका लाभ उठा सकते हैं।

वरिष्ठ नागरिक बचत योजना

पोस्ट ऑफिस में विशेष रूप से वरिष्ठ नागरिकों के लिए इस योजना की पेशकश की है, जिसे "वरिष्ठ नागरिक बचत योजना" के रूप में जाना जाता है। यह योजना वर्तमान में 7।4% का ब्याज दे रही है।

सुकन्या समृद्धि खाता योजना

इंडियन पोस्ट ऑफिस लोगों को एक अद्भुत छोटी बचत योजना प्रदान करता है, जिसे सुकन्या समृद्धि खाता योजना के नाम से जाना जाता है। यह योजना सबसे अधिक 7।6% ब्याज प्रदान करती है, और इस योजना के तहत पैसा दुगुना होने में 9 साल का समय लगता है। इस योजना के तहत एक वित्तीय वर्ष में न्यूनतम 250 रुपये और अधिकतम 1,50,000 रुपये जमा किए जा सकते हैं।

किसान विकास पत्र योजना

किसान विकाश पत्र योजना के माध्यम से आप इस योजना में भी निवेश कर सकते हैं , वर्तमान में यह केवल 6।9% ब्याज दर प्रदान करता है, इस ब्याज दर के साथ, यहां निवेश की गई राशि 10 साल 4 महीने में दोगुनी हो जाती है।

पब्लिक प्रोविडेंट फंड

भारतीय डाक 7।1% ब्याज वाले लोगों के लिए 15 साल का सार्वजनिक भविष्य निधि प्रदान करता है। इस दर से आपका पैसा दोगुना होने में लगभग 10 साल लगेंगे। इस योजना के तहत एक वित्तीय वर्ष में न्यूनतम 500 रुपये और अधिकतम 1,50,000 रुपये की राशि जमा की जा सकती है। जमा एकमुश्त या किश्त में किया जा सकता है।

राष्ट्रीय बचत प्रमाणपत्र योजना

अगर आप इस योजना में हर महीने बहुत कम निवेश करना शुरू करते हैं तो आप बड़ी रकम कमा सकते हैं। यह योजना 6।8% ब्याज प्रदान करती है जो कि 5 साल की बचत योजना है और यदि इस ब्याज दर के साथ पैसा निवेश किया जाता है, तो यह लगभग 10 वर्षों में दोगुना हो जाएगा।

पोस्ट ऑफिस टाइम डिपॉजिट

पोस्ट ऑफिस टाइम डिपॉजिट ( Post Office Time Deposit) स्कीम है, जिसमें में आप 1 से 3 साल तक के लिए पैसे डाल सकते हैं। इसमें 5।5 प्रतिशत सालाना ब्याज मिलता है। यदि आप इस स्कीम में पैसा डालते हैं, तो लगभग 13 साल में आपका पैसा दोगुना हो जएगा।

पोस्ट ऑफिस सेविंग बैंक अकाउंट

यदि आप पोस्ट ऑफिस सेविंग अकाउंट में पैसा रखते हैं , तो आपको पैसा डबल करने के लिए काफी लम्बे समय तक इंतजार करना पड़ेगा। इसमें मात्र 4 प्रतिशत ब्याज मिलता है। इस स्कीम में पैसा दुगुने होने में 18 साल लग जाते हैं।

पोस्ट ऑफिस रिकरिंग डिपॉजिट

पोस्ट ऑफिस की रिकरिंग डिपॉजिट स्कीम में ( RD) 5।8 प्रतिशत सालाना ब्याज मिलता है। जिसमें पैसा डबल होने में 12।5 साल लगता है।

पोस्ट ऑफिस मंथली इनकम स्कीम

पोस्ट ऑफिस की मंथली इनकम योजना ( MIS) है। जिसमें 6।6% का ब्याज मिलता है। अगर इस ब्याज दर पर पैसा लगाया जाए तो यह लगभग 10।91 साल में दोगुना हो जाएगा।

आज ही प्लान बनाएं और शुरू करें बच्चों के लिए बचत योजनाएं

आने वाले वर्षों में बच्चों का भविष्य आर्थिक रूप से सुरक्षित बना रहे, इसके लिए पेरेंट्स बच्चों के लिए बचत योजनाएं शुरू कर सकते हैं। ऐसे कई बच्चों के लिए स्कीम भारत सरकार की तरफ से शुरू किए बचत योजनाएं गए हैं, जो सुरक्षा के साथ ही उच्च ब्याज दर देने का भी वादा करते हैं। यहां पर आप बच्चों के लिए पोस्ट ऑफिस योजना से लेकर उनके लिए फंड और अन्य सेविंग्स प्लान के बारे में पढ़ेंगे।

पोस्ट ऑफिस में छोटे बच्चों के लिए क्या स्कीम है?

बच्चों के लिए बचत योजनाएं में कई तरह की योजनाएं शामिल हैं, जिनमें सबसे पहले हम बच्चों के लिए पोस्ट ऑफिस योजना के बारे में बता रहे हैं। बच्चों के लिए पोस्ट ऑफिस स्कीम कई हैं, जिन्हें पेरेंट्स अपनी इच्छानुसार से चुन सकते हैं।

1. पोस्ट ऑफिस की मंथली इनकम स्कीम (Post Office Monthly Income Scheme)

अगर बच्चों के लिए स्कीम को पूरी तरह से सुरक्षित योजना चुनना चाहते हैं, तो पोस्ट ऑफिस की मंथली इनकम स्कीम को शुरू कर सकते हैं। यह बच्चों के लिए बचत योजना है, जिसमें एक बार में पैसा इंवेस्ट करना होता है, हर महीने उसके ब्याज का लाभ लिया जा सकता है।

  • इस योजना को अपने क्षेत्र के किसी भी पोस्ट ऑफिस में जाकर खुलवा सकते हैं।
  • इसे खुलवाने के लिए कम से कम 1,000 रुपये व ज्यादा से ज्यादा 4,50,000 (साढ़े चार लाख) रुपए जमा कर सकते हैं।
  • इस स्कीम पर 6.6% की दर से ब्याज दिया जाता है।
  • बच्चों के लिए पोस्ट ऑफिस की इस बचत योजना का लाभ 10 साल की उम्र का होने पर लिया जा सकता है। अगर बच्चा 10 वर्ष से छोटा है, तो पैरेंट्स के नाम पर यह अकाउंट खुलवाया जा सकता है।
  • यह स्कीम 5 सालों की मैच्योरिटी के साथ होती है। यानी 5 साल होने के बाद इस योजना को बंद किया जा सकता है।

2. पोस्ट ऑफिस रेकरिंग डिपॉजिट स्कीम (Post Office Recurring Deposit Scheme)

पोस्ट ऑफिस रेकरिंग डिपॉजिट स्कीम भी बच्चों के लिए एक अच्छी योजना है। इसकी क्या खासियत है, इसे कैसे खुलवा सकते हैं, इनके बारे में नीचे पढ़ें।

  • 10 वर्ष व उससे अधिक उम्र के बच्चों के लिए बचत योजनाएं में इसका नाम शामिल है।
  • अगर बच्चा 10 वर्ष से छोटी आयु का है, तो बच्चे की तरफ से पेरेंट्स के नाम पर इस स्कीन को शुरु किया जा सकता है।
  • इसमें कम से कम 100 रुपये की जमा राशि के साथ खुलवा सकते हैं।
  • इसकी खासियत है कि इस स्कीन में अधिकतम राशि जमा करने की कोई सीमा नहीं है।
  • इसमें 5.8% की दर से गारंटीड रिटर्न ब्याज मिलता है।
  • यह स्कीम 5 सालों में पूरी हो जाती है। अगर इससे आगे भी इसे बढ़ाना है, तो इसके लिए पोस्ट ऑफिस में निवेदन करना होगा।

3. सुकन्या समृद्धि योजना (Sukanya Samriddhi Yojana)

सुकन्या समृद्धि योजना (SSY) लाभ सिर्फ लड़कियों के लिए ही जारी किया गया है। इसके लिए लड़की का भारतीय होना जरूरी है। इससे जुड़ी और खास बातें क्या हैं, जानने के लिए स्क्रॉल करें।

  • 10 वर्ष या उससे अधिक अधिक आयु की लड़कियों के नाम पर इस योजना का लाभ लिया जा सकता है।
  • अगर लड़की की उम्र 10 वर्ष से छोटी है, तो उसकी जगह पर पेरेंट्स के नाम पर यह योजना खुल सकती है।
  • सुकन्या समृद्धि योजना को किसी भी सरकारी बैंक या पोस्ट ऑफिस में खुलवाया जा सकता है।
  • इस योजना में 7.6​​% की दर से ब्याज मिलता है।
  • इस योजना में सालाना तौर पर कम से कम 250 रुपये की राशि जमा करनी होती।
  • अधिकतम राशि की सीमा 1,50,000 रुपये हैं।
  • इतना ही नहीं, इस योजना के जरिए निवेश इनकम टैक्स एक्ट की धारा 80C के तहत टैक्स छूट भी लिया जा सकता है।
  • इस स्कीम को शुरू करने के बाद लड़की के 15 वर्ष होने तक एक तय राशि को जमा करना होता।
  • लड़के के 21 वर्ष के पूरे होने पर यह योजना मैच्योर होती है।
  • इसके अलावा, अगर लड़की की शादी 21 वर्ष से पहले होती है, तो भी इस योजना को मैच्योर किया जा सकता है।

4. पब्लिक प्रोविडेंट फंड (Public Provident Fund)

पब्लिक प्रोविडेंट फंड को पीपीएफ (PPF) भी कहा जाता है। यह एक लंबे समय तक चलने वाली बचत योजना है, जिसे बच्चों के लिए बचत योजना में शामिल किया जा सकता है।

  • इस योजना में 7.1% की दर से हर साल ब्याज मिलता है।
  • इस योजना को न्यूनतम 500 रुपये और अधिकतम 1,50,000 रुपये से खोला जा सकता है।
  • यह राशि एक बार में या अलग-अलग किस्तों के जरिए जमा कर सकते हैं।
  • नाबालिग बच्चे इस स्कीम का सीधे तौर पर लाभ नहीं पा सकते हैं। अगर कोई बच्चा बालिग नहीं है, तो उसकी जगह पर पेरेंट्स इस स्कीम को शुरू कर सकते हैं।
  • इसे किसी भी बैंक या पोस्ट ऑफिस के जरिए ओपन किया जा सकता है।
  • अगर किसी वित्तीय वर्ष इस स्कीम में कम से कम 250 की राशि जमाा न की जाए, तो स्कमी को रद्द भी किया जा सकता है।
  • यह अकाउंट धारा 80C के तहत टैक्स में राहत दिला सकती है।
  • यह अकाउंट खुलाने के अगले दो सालों में जमा राशि के अनुसार 25% तक लोन मिल सकता है।
  • यह योजना खुलवाने के अगले 15 सालों में मैच्योर होती है।
  • कुछ आपात स्थितियों में इस योजना को 5 सालों में भी बंद करवाया जा सकता है, जैसे – बच्चे की महंगी पढ़ाई होने पर या उसका विदेशी बनने पर। ऐसी स्थिति में सिर्फ 6.1% का ब्याज दर ही दिया जा सकता है।

5. इक्विटी म्यूचुअल फंड (Equity Mutual Fund)

इक्विटी म्यूचुअल फंड (ETF) बच्चों के लिए पोस्ट ऑफिस योजना या बच्चों के लिए किसी भी अन्य बचत योजना के मुकाबले अधिक रिटर्न देता है। अगर चाहते हैं कि भविष्य में बच्चे की पढ़ाई पर अच्छा निवेश करें, तो बच्चों के लिए स्कीम का लाभ लिया जा सकता है।

  • यह एक प्रकार का सिस्टेमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) यानी म्यूचुअल फंड है।
  • जो लॉन्ग व शॉर्ट दोनों की अवधि के लिए किया जा सकता है।
  • हालांकि, लंबी अवधि में इसका रिटर्न रेट भी अधिक मिल सकता है। यह पूरी तरह से फंड के आधार पर हो सकता है। यानी अगर यह फंड अधिर रिस्की है, तो रिटर्न ब्याज दर भी अधिक मिल सकता है।
  • इसके लिए बच्चे बालिक होना चाहिए। अगर वह 21 वर्ष से छोटा है, उसकी जगह पर पेरेंट्स इस फंड को शुरू कर सकते हैं।
  • इसके लिए आप ऑनलाइन या ऑफलाइन दोनों ही तरह से बात की जा सकती है। इसके लिए जरूरी है ऑनलाइन अपने सभी दस्तावेजों को सबमिट करना भी।

बच्चों के लिए बचत योजनाएं कई हैं। जिनमें बच्चों के लिए पोस्ट ऑफिस योजना से लेकर म्यूचुअल फंड के भी विकल्प मौजूद हैं। उम्मीद है कि बच्चों के लिए स्कीम से जुड़ी हमारी दी गई जानकारी आपको पसंद आई होगी। आप यहां बताए गए बच्चों के लिए बचत योजना में से किसी एक या एक साथ अन्य योजनाओं को शुरू कर सकते हैं और उसका लाभ ले सकते हैं।

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