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इक्विटी पर व्यापार क्या है

इक्विटी पर व्यापार क्या है
जो निवेशक मासिक नियमित आय चाहते हैं और जो लंबी अवधि के लिए मोटा निवेश कर सकते हैं, यह उनके लिए बेहतर है।

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लीवरेज क्या है? परिभाषा, महत्व, सीमाएं

लिवरेज शब्द की उत्पत्ति लीवर शब्द से हुई है। लीवर से आशय उस स्थिति से इक्विटी पर व्यापार क्या है है जिसके द्वारा कम से कम बल लगाकर अधिक से अधिक कार्य किया जा सके। वित्तीय प्रबंध के अंतर्गत लिवरेज से आशय वित्तीय लिवरेज से है अर्थात् वित्तीय मामलों से संबंधित अध्ययन किया जाता है, वित्तीय लिवरेज कहलाता है। पूंजी संरचना निर्णयों मे अत्यधिक महत्वपूर्ण भूमिका अदा करता है।

उत्तोलक संस्था की लाभ अर्जन क्षमता एवं वित्तीय सुदृढ़ता दोनों को प्रभावित करता है। किसी भी कंपनी मे वित्तीय लिवरेज उस समय माना जाता है जब उस कंपनी मे समता पर व्यापार चल रहा हो। यदि कोई कंपनी क्षमता अंश पूंजी से कम तथा ऋण पूंजी से अधिक वित्त प्राप्त करती है तथा वित्त का अधिकतम प्रयोग करके लाभ को अधिकतम करती है तो यह कहा जाता है कि इस संस्था मे वित्तीय लिवरेज का प्रयोग हुआ है।

लीवरेज की परिभाषा

प्रो. कुच्छल के अनुसार," लीवरेज का आशय वित्त प्रबंधन मे स्थायी लागत के सहन करने या स्थायी प्रत्याय का भुगतान करने से है।"

सोलोमन इजरा के अनुसार," अंशधारियों को इक्विटी पर मिलने वाली प्रत्याय दर का कूल पूंजीकरण की प्रत्याय दर के साथ अनुपात को लीवरेज कहते है।

जे. ई. वाल्टर के अनुसार," सामान्य अंशधारियों को मिलने वाले प्रत्याय प्रतिशत तथा कुल पूंजीकरण की प्रत्याय प्रतिशत से पारस्परिक अनुपात लिवरेज कहलाता है।"

वेस्टन हाल्ट के अनुसार," वित्तीय लिवरेज के या तो कुल ऋणों की शुद्ध राशि के साथ अनुपात के रूप मे या कुल ऋणों की कुल संपत्तियों के साथ अनुपात के रूप मे परिभाषित किया जा सकता है।"

उपर्युक्त परिभाषाओं का अध्ययन करने के बाद हम कह सकते है कि वित्तीय लिवरेज का आशय उस स्थिति से है जिसके अंतर्गत सामान्य पूंजी कम मात्रा मे प्रयोग की जाती है तथा ऋण पूंजी व पूर्वाधिकार पूंजी अधिक मात्रा मे प्रयोग की जाती है। सामान्यतः यदि संस्था की आय पूर्वाधिकार अंश पूंजी एवं सामान्य अंश पूंजी लागत से अधिक होती है तो संस्था की पूंजी दंतीकरण अनुपात अवमूलतम कहलाता है। दंतीकरण अनुपात जितना ऊंचा होगा सामान्य अंशधारियों को प्राप्त होने वाला लाभांश उतना ही अधिक होगा।

व्यवसाय में लिवरेज दो प्रकार का हेाता है--

1. परिचालन उत्तोलक

यदि संस्‍था को स्‍थायी व्‍यय वहन सहन करने पड़ते है जिनका उत्‍पादन के स्‍तर पर कोई प्रभाव न हो तब हम कहेंगे कि संस्‍था में परिचालन उत्तोलक विद्यमान है। संस्‍था की लागतों को दो भागों में विभक्‍त करते है--

(अ) स्‍थायी परिवर्तनशील लागतें

(ब) अर्द्ध परिवर्तनशील लागते।

प्राय: स्‍थायी परिवर्तनशील लागतें ही महत्‍वपूर्ण होती है। वेसे परिचालन उत्तोलक ब्‍याज एंव कर घटाने से पूर्ण लाभ में हुए प्रतिशत परिवर्तन तथा विक्रय की प्रतिशत में हुए परिवर्तन के पारस्‍परिक संबंध को प्रदर्शित करता है।

2. वित्तीय उत्तोलक

सालोमन के अनुसार,''वित्तीय उत्तोलक संस्‍था की गतिविधियों में प्रयुक्‍त ऋण तथा सामान्‍य कोषों के इक्विटी पर व्यापार क्या है मिश्रण को बताता है।''

बार्न हार्न के अनुसार,'' वित्तीय उत्तोलक में स्‍थायी लागत कोषों इक्विटी पर व्यापार क्या है का प्रयोग साधारण अंशधारियों के प्रत्‍याय बढा़ने की आशा में किया जाता है।''

इकोनॉमी के लिए बुरी खबर, नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा देश का व्यापार घाटा

इकोनॉमी के लिए बुरी खबर, नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा देश का व्यापार घाटा

इकोनॉमी के मोर्चे पर एक बुरी खबर आई है। दरअसल, जून माह में व्यापार घाटा रिकॉर्ड 26.18 अरब डॉलर के स्तर पर पहुंच गया है। इसका मतलब ये हुआ कि जून महीने में भारत ने विदेशों से आयात ज्यादा किया है। इस वजह से विदेशी मुद्रा भंडार भरने की बजाए खाली ज्यादा हो रहा है, जो इकोनॉमी के लिए ठीक नहीं है। आपको बता दें कि जून के आखिरी सप्ताह में देश का विदेशी मुद्रा भंडार 5.008 अरब डॉलर घटकर 588.314 अरब डॉलर रह गया था।

क्या कहते हैं आंकड़े: जून, 2022 में वस्तुओं का निर्यात 23.52 प्रतिशत बढ़कर 40.13 अरब डॉलर पर पहुंच गया है। वहीं, वस्तुओं का आयात सालाना आधार पर 57.55 प्रतिशत के उछाल के साथ 66.31 अरब डॉलर पर पहुंच गया। इससे व्यापार घाटा बढ़कर रिकॉर्ड 26.18 अरब डॉलर हो गया है। जून, 2021 में व्यापार घाटा 9.60 अरब डॉलर रहा था।

भारतीय बाजार में जारी रहेगी तेजी, क्रूड और दूसरी अहम कमोडिटीज की कीमतों में गिरावट से बड़ा सपोर्ट

बाजार जानकारों का अनुमान है कि आरबीआई की तरफ से आगे हमें ब्याज दरों में बढ़ोतरी पर लगाम लगती नजर आ सकती है। अक्टूबर महीने में रिटेल महंगाई में कमी देखने को मिली थी। थोक महंगाई के मोर्चे पर भी राहत मिली है। ऐसे कच्चे तेल और कमोडिटी की कीमतों में गिरावट से महंगाई आगे और घटती नजर आएगी। ऐसे में एनालिस्टों को भारतीय बाजारों की रिकॉर्ड ब्रेकिंग रैली जारी रहने की संभावना दिख रही है। जानकारों का यह भी कहना है कि कच्चे तेल और मेटल की कीमतों में आई भारी गिरावट के साथ ही खरीफ और रवी की फसलों की बंपर बुवाई से इस बात के संकेत हैं कि अगले कुछ महीनों में हमें इक्विटी पर व्यापार क्या है महंगाई और कम होती दिखेगी।

एफआईआई की खरीदारी से आएगी तेजी

इसके अलावा भारतीय इक्विटी मार्केट में एफआईआई की तरफ से हो रही खरीदारी भी मार्केट सेंटीमेंट में सुधार करेगी। बतातें चलें कि मध्य अक्टूबर से अब तक एफआईआई ने भारतीय बाजार ने 4.64 अरब डॉलर की खरीदारी की है। जबकि ये इस साल के शुरुआत से मध्य अक्टूबर तक भारतीय बाजार में नेट सेलर रहे थे। साल के शुरुआत से अक्टूबर के मध्य तक एफआईआई ने भारतीय बाजारों में 23 अरब डॉलर की बिकवाली की थी।

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क्रूड और दूसरी अहम कमोडिटीज की कीमतों में गिरावट से राहत

पिछले एक हफ्ते में क्रूड ऑयल की कीमतों में 9.38 फीसदी की गिरावट हुई है। यह एक हफ्ते पहले के 94 डॉलर प्रति बैरल से घटकर 83 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया है। ये इसका पिछले 10 महीने का सबसे निचला स्तर है। इसी तरह दूसरी बड़ी कमोडिटीज पर नजर डालें तो लंदन मेटल एक्सचेंज पर पिछले एक हफ्ते में एल्यूमिनियम में 3.7 फीसदी की, कॉपर में 7.इक्विटी पर व्यापार क्या है 8 फीसदी की, जिंक में 8.4 फीसदी की और निकिल में 17.7 फीसदी की गिरावट देखने को मिली है।

निवेश पर अच्छे रिटर्न के लिए क्या है बेहतर विकल्प, आइये जानें

नई दिल्ली, डेस्क रिपोर्ट। अक्सर लोग निवेश करने से पहले इस उलझन में फंसे रहते हैं कि सोना-चांदी, रियल एस्टेट, फिक्स डिपॉजिट या शेयर बाजार और म्यूचुअल फंड में से किस एसेट क्लास में निवेश किया जाए, ताकि बेहतर रिटर्न मिले। निवेश सलाहकार (investment advisor) का कहना है कि इनमें कोई भी निवेश विकल्प सबसे बढ़िया या खराब नहीं है। अच्छा निवेश विकल्प व्यक्ति की जरूरतों, वित्तीय लक्ष्य और जोखिम उठाने की क्षमता पर निर्भर करता है।

कैसे तय करें विकल्प

सोना और रियल एस्टेट, दोनों लंबी अवधि के लिए अच्छे निवेश विकल्प हैं। गोल्ड भारत में भरोसेमंद निवेश के तौर पर देखा जाता है। आप फिजिकल गोल्ड के साथ डिजिटल गोल्ड और सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड में निवेश कर सकते हैं। सोना महंगाई के खिलाफ सबसे सुरक्षित निवेश है। वहीं, रियल एस्टेट हमेशा ही एक इक्विटी पर व्यापार क्या है बड़े निवेश के तौर पर देखा जाता है। रियल एस्टेट में जहां जोखिम कम रहता है, वहीं, गोल्ड में चोरी होने का डर बना रहता है। रियल एस्टेट में अतिरिक्त टैक्स बेनिफिट के साथ नियमित आय पैदा करने की क्षमता है। चाहे आवासीय हो या वाणिज्यिक, रियल एस्टेट में मासिक किराए के रूप में निवेशकों के लिए आय उत्पन्न करने की क्षमता होती है, जो कि सोने के निवेश में संभव नहीं है। जबकि इक्विटी और म्यूचुअल फंड में लंबी अवधि मे सबसे अधिक रिटर्न मिलता है, पर इनमें जोखिम भी सबसे अधिक है, तो आइये जानते है…

इक्विटी फाइनेंस के क्या फायदे हैं? [What are the benefits of Equity Finance? In Hindi]

आप अपनी व्यक्तिगत बचत और बिक्री से उत्पन्न इक्विटी पर व्यापार क्या है नकदी प्रवाह का उपयोग करके अपना व्यवसाय शुरू करने और विकसित करने में सक्षम हो सकते हैं। लेकिन इसमें अक्सर लंबा समय लग सकता है। इक्विटी फंडिंग के साथ, आप बहुत अधिक और तेजी से बढ़ सकते हैं, जिससे आप तेजी से बढ़ते बाजारों में प्रतिस्पर्धात्मक लाभ प्राप्त कर सकते हैं।

वित्त के इस रूप के कुछ मुख्य लाभ ये हैं:

  • कर्ज से मुक्ति (Freedom from debt) - आप नियमित ऋण चुकौती के बोझ के बिना अपनी विकास योजनाओं पर ध्यान केंद्रित कर सकते हैं।
  • अधिक पूंजी (More इक्विटी पर व्यापार क्या है Capital) - आप आम तौर पर ऋण वित्त के मुकाबले इक्विटी वित्त के साथ बड़ी मात्रा में धन जुटा सकते हैं।
  • व्यावसायिक अनुभव, कौशल और संपर्क (Business experience, skills, and contacts) - कुछ निवेशक सिर्फ पैसे के अलावा और भी बहुत कुछ लाएंगे। वे विशेषज्ञता, ज्ञान और संपर्कों के रूप में अतिरिक्त मूल्य प्रदान करेंगे, जो आपके व्यवसाय इक्विटी पर व्यापार क्या है के विकास को गति देने में मदद कर सकते हैं।
  • फॉलो-ऑन फंडिंग (Follow-on funding) - जैसे-जैसे आपकी कंपनी बढ़ती है, निवेशक अक्सर अतिरिक्त फंडिंग देने के लिए तैयार रहते हैं।
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