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चित्र ध्वज

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Tiranga

भारत का तो तिरंगा है, पाकिस्तान के झंडे को क्या कहते हैं? अमेरिका, ब्रिटेन और फ्रांस का भी जान लीजिए

रूस का राष्ट्रीय ध्वज भी तीन रंगों की पट्टियों से मिलकर बना है, जिसमें खूनी लाल, गाढ़ा नीला और सिलेटी रंग शामिल हैं. अपने राष्ट्रीय ध्वज को रूसी लोग ट्राईकोलोर कह के बुलाते हैं.

TV9 Bharatvarsh | Edited By: निलेश कुमार

Updated on: Aug 08, 2022, 9:42 PM IST

भारत का तो तिरंगा है, पाकिस्तान के झंडे को क्या कहते हैं? अमेरिका, ब्रिटेन और फ्रांस का भी जान लीजिए

पाकिस्तान का झंडा हरे और सफेद रंग का है. इसमें एक चांद और तारा भी बना हुआ है. पाकिस्तान के राष्ट्रीय झंडे को 'परचम-ए सितारा ओ-हिलाल' कहकर बुलाया जाता है.

पाकिस्तान का झंडा हरे और सफेद रंग का है. इसमें एक चांद और तारा भी बना हुआ है. पाकिस्तान के राष्ट्रीय झंडे को 'परचम-ए सितारा ओ-हिलाल' कहकर बुलाया जाता है.

ब्रिटेन को इंगलैंड और यूके यानी यूनाइटेड किंगडम के नाम से भी जाना जाता है. ब्रिटेन के राष्‍ट्रीय ध्‍वज को दो नामों से बुलाया जाता है. यूनियन जैक और यूनियन फ्लैग. वैसे यूनियन जैक नाम ज्‍यादा पॉपुलर हुआ.

ब्रिटेन को इंगलैंड और यूके यानी यूनाइटेड किंगडम के नाम से भी जाना जाता है. ब्रिटेन के राष्‍ट्रीय ध्‍वज को दो नामों से बुलाया जाता है. यूनियन जैक और यूनियन फ्लैग. वैसे यूनियन जैक नाम ज्‍यादा पॉपुलर हुआ.

America

फ्रांस के नेशनल फ्लैग में मुख्‍य रूप से तीन रंग शामिल हैं, जिनमें लाल, नीला और सफेद रंग शामिल है. इसे भी तिरंगा के नाम से जाना जाता है, जिसे अंग्रेजी में ट्राईकलर कह के बुलाया जाता है.

फ्रांस के नेशनल फ्लैग में मुख्‍य रूप से तीन रंग शामिल हैं, जिनमें लाल, नीला और सफेद रंग शामिल है. इसे भी तिरंगा के नाम से जाना जाता है, जिसे अंग्रेजी में ट्राईकलर कह के बुलाया जाता है.

रूस का राष्ट्रीय ध्वज भी तीन रंगों की पट्टियों से मिलकर बना है, जिसमें खूनी लाल, गाढ़ा नीला और सिलेटी रंग शामिल हैं. अपने राष्‍ट्रीय ध्‍वज को रूसी लोग ट्राईकोलोर कह के बुलाते हैं.

रूस का राष्ट्रीय ध्वज भी तीन रंगों की पट्टियों से मिलकर बना है, जिसमें खूनी लाल, गाढ़ा नीला और सिलेटी रंग शामिल हैं. अपने राष्‍ट्रीय ध्‍वज को रूसी लोग ट्राईकोलोर कह के बुलाते हैं.

Har Ghar Tiranga : 75वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर सोशल मीडिया पर आपके डीपी के रूप में भारतीय ध्वज की फोटो लगाएं

Har Ghar Tiranga : On the occasion of 75th Independence Day, put photo of Indian flag as your DP on social media

प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को अपने सोशल मीडिया पेजों की डिस्प्ले पिक्चर (डीपी) को चित्र ध्वज भारत के राष्ट्रीय ध्वज में बदल दिया और सभी देशवासियों से 2 अगस्त से 15 अगस्त के बीच हर घर तिरंगा' चित्र ध्वज अभियान के तहत अपने सोशल मीडिया प्रोफाइल पिक्चर्स के रूप में 'तिरंगा' का उपयोग करने का आग्रह किया। ' उन्होंने ट्वीट किया, "आज 2 अगस्त विशेष है। ऐसे समय में जब हम आजादी का अमृत महोत्सव मना रहे हैं, हमारा देश तिरंगा मनाने के लिए एक सामूहिक आंदोलन #HarGharTiranga के लिए पूरी तरह तैयार है।"

उन्होंने कहा, "मैंने अपने सोशल मीडिया पेजों पर डीपी बदल दी है और आप सभी से भी ऐसा करने का आग्रह करता हूं।"सरकार ने भारतीय ध्वज संहिता में संशोधन किया है ताकि तिरंगे को खुले में और अलग-अलग घरों या इमारतों में दिन और रात में प्रदर्शित किया जा सके। यहां कुछ भारतीय ध्वज की फोटो दी गई हैं जिन्हें आप अपने डीपी के रूप में सोशल मीडिया पर लगा सकते हैं।

भारत के राष्ट्रीय ध्वज में 1906 से 1947 तक किस तरह आए बदलाव… कुछ ऐसी रही है देश के तिरंगे की यात्रा, बता रहे हैं इतिहासकार.

साल 1906 से 1947 तक हमारे राष्ट्रिय ध्वज में काफी बदलाव आए हैं. अशोक चक्र वाले इस झंडे के राष्ट्रीय ध्वज बनने की कहानी बहुत लंबी है. इसी कहानी के बारे में बता रहे हैं इतिहासकार कपिल कुमार.

Tiranga

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तेजश्री पुरंदरे

  • नई दिल्ली,
  • 03 अगस्त 2022,
  • (Updated 03 अगस्त 2022, 10:11 PM IST)

1857 को मनाया था पहला स्वतंत्रता संग्राम

पेरिस में भी फहराया गया था ध्वज

भारत के राष्ट्रीय ध्वज में 1906 से लेकर साल 1947 तक अलग-अलग बदलाव आए हैं. आज जो हमें ध्वज दिखता है वह पहले से वाले काफी चित्र ध्वज अलग है. इसी को लेकर इतिहासकार कपिल कुमार कहते हैं कि भारत के राष्ट्रीय ध्वज का इतिहास बहुत पुराना है. वर्तमान में जो हमारे देश राष्ट्रीय ध्वज है, उससे पहले कई बार ध्वज बदल चुके हैं. अशोक चक्र वाले इस झंडे के राष्ट्रीय ध्वज बनने की कहानी बहुत लंबी है और इस यात्रा में भारत के कई झंडे रह चुके हैं.

1857 को मनाया था पहला स्वतंत्रता संग्राम

इतिहासकार कपिल बताते हैं कि 1857 को हमने पहला स्वतंत्रता संग्राम मनाया था. उस दौरान सबका अपना-अपना झंडा था, लेकिन पहली बार क्रांतिकारियों ने एक झंडे को अपना झंडा बनाया. वह एक हरे रंग का झंडा था जिसके ऊपर कमल था. आजाद हिंदुस्तान की पहली लड़ाई के लिए यही वो झंडा था जिसे फहराया गया था.

उन्होंने आगे बताया कि साल 1906 में कोलकाता के पारसी बागान चौक पर तिरंगा फहराया गया था. इस पर हरे पीले और लाल रंग से बनाया गया था. इसके मध्य में वंदे मातरम भी लिख गया था.

पेरिस में फहराया गया ध्वज

इतिहासकार कपिल बताते हैं कि उसके बाद 1907 में मैडम कामा द्वारा भारतीय क्रांतिकारियों की मौजूदगीमें पेरिस में यह ध्वज फहराया गया था. इसमें 1906 वाले तिरंगे से कुछ ज्यादा बदलाव नहीं थे, लेकिन इसमें सबसे ऊपर लाल पट्टी का रंग केसरिया का और कमल के बजाय सात तारे थे जो सप्त ऋषि का प्रतीक थे. इसमें आखरी पट्टे पर सूरज और चांद भी अंकित किए गए थे.

कब आया तीसरा झंडा?

कपिल का कहना है कि साल 1917 में जब राजनीतिक संघर्ष ने एक नया मोड़ लिया तब तीसरा झंडा आया. कह सकते हैं कि होमरूल आंदोलन की आड़ में तीसरे ध्वज को रूप दिया गया. डॉ. एनी बेसेंट और लोकमान्‍य तिलक ने घरेलू शासन आंदोलन के दौरान इसे फहराया था. इस ध्वज में पांच लाल और चार हरी क्षितिज पट्टियां थीं. इसमें खास तौर पर यूनियन जैक भी मौजूद थे. यानी की प्राचीन परंपरा को दर्शाते हुए सप्तऋषि, और एकता दिखाने के लिए चांद और तारे मौजूद थे. इस तिरंगे से यह दिखाने की कोशिश की गई कि इससे स्वतंत्रता तो नहीं मिली लेकिन स्वयं शासन का अधिकार जरूर मिला.

इसके बाद कुछ ऐसा रहा राष्ट्रिय ध्वज का सफर

इतिहासकार कपिल बताते हैं कि इसके बाद साल 1921 में जब भारत अंग्रेजो की गुलामी से आजाद होने की कोशिश कर रहा था उस वक्त यह दो रंगों का बना था, जिसमें लाल-हरा मौजूद था. गांधी जी ने सुझाव दिया था कि भारत के शेष समुदाय का प्रतिनिधित्‍व करने के लिए इसमें एक सफेद पट्टी और राष्‍ट्र की प्रगति का संकेत देने के लिए एक चलता हुआ चरखा होना चाहिए. इसलिए इस वक्त इसमें चरखा भी जोड़ा गया.

इसी के बीच एक महत्वपूर्ण झंडा और है जिसका जिक्र कहीं पर नहीं है. यह वो झंडा है जो नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने जर्मनी में भारतीय रीजन बनाने के बाद फहराया था. उस तिरंगे में भी ऊपर केसरिया, बीच में सफेद, नीचे हरा और बीच में एक टाइगर मौजूद था. यह एक बहुत ही महत्वपूर्ण झंडा है.

जब आया तिरंगा में अशोक चक्र

कपिल आगे कहते हैं, “बहरहाल 1931 में ध्वज को केसरिया, सफेद और हरे रंग के साथ, मध्‍य में गांधी जी के चलते हुए चरखे का साथ मिला. इसके बाद अशोक चक्र का सफर आता है. ये चित्र ध्वज साल 1947 था. जिसमें सावरकर ने चरखे की कमेटी को एक टेलीग्राम भेजा था. उन्होंने कहा था कि तिरंगे के बीच में मध्य में अशोक चक्र होना चाहिए.”

बता दिन, 22 जुलाई 1947 को संविधान सभा ने इसे आजाद भारतीय राष्‍ट्रीय ध्‍वज के रूप में अपनाया. इतिहासकार कपिल कहते हैं कि स्‍वतंत्रता मिलने के बाद इसके रंग और उनका महत्‍व बना रहा. अशोक चक्र होने का महत्व यह है कि अशोक चक्र अखंड भारत को परिभाषित करता है. क्योंकि अशोक का साम्राज्य अफगानिस्तान से लेकर नीचे तक मौजूद था तो इसीलिए अशोक चक्र एक बड़े, दिव्य और विशाल भारत का प्रतीक बनता है.

हर घर तिरंगा अभियानः सब कुछ जानें औऱ तुरंत फहराएं घर पर राष्ट्रीय ध्वज

Har Ghar Tiranga Campaign

भारत (India) 2022 में आजादी की 75वीं सालगिरह मनाने की तैयारियों में युद्धस्तर पर जुटा हुआ है. इस कड़ी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) ने सभी लोगों से हर घर तिरंगा अभियान (Har Ghar Tiranga Campaign) में भाग लेने का आह्वान किया है. यह राष्ट्रीय स्तर पर मनाए जा रहे आजादी का अमृत महोत्सव (Azadi Ka Amrit Mahotsav) की ही एक कड़ी है. यद्यपि आजादी के अमृत महोत्सव का वास्तविक उत्सव 13 से 15 अगस्त के बीच मनाया जाएगा, लेकिन हर घर तिरंगा अभियान से जुड़े कार्यक्रम 2 अगस्त से शुरू हो चुके हैं. इस अभियान का मकसद लोगों को अपने घर पर तिरंगा (Tricolour) फहराने के लिए प्रेरित करना है. इससे लोगों में देशभक्ति की भावना जागेगी और तिरंगे को लेकर उनमें और समझ आएगी.

इस तरह भाग लें अभियान में
हर घर तिरंगा अभियान के तहत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2 अगस्त को लोगों से अपनी-अपनी सोशल मीडिया प्रोफाइल की फोटो को तिरंगे से बदलने का आह्वान किया. इसके अतिरिक्त शैक्षणिक संस्थान हर घर तिरंगा से जुड़ी चित्रकला प्रतियोगिताएं, क्विज और अन्य प्रतिस्पर्धाएं आयोजित कर रहे हैं. उनका मकसद इस तरह भारतीयों में देशभक्ति की भावना का संचार करना है. हालांकि घर पर तिरंगा फहराने की कड़ी में लोगों से अपेक्षा की जाती है कि वह झंडा नीति यानी फ्लैग कोड ऑफ इंडिया के नियम-कायदों का ध्यान रखेंगे. मसलन फ्लैग कोड ऑफ इंडिया 2022 के तहत राष्ट्रीय ध्वज को उल्टा या जमीन से छूते हुए और सिंगल फ्लैग पोल से नहीं फहरा सकते हैं. इस कड़ी में यह भी ध्यान रखना है कि तिरंगे की सुरक्षा में ऐसे कदम भी नहीं उठाए जाएं जो उसे क्षतिग्रस्त कर दें. इसके अलावा तिरंगे को शरीर पर लपेटा नहीं जा सकता है. उसे बतौर रूमाल इस्तेमाल नहीं कर सकते हैं यानी रूमाल पर तिरंगे को नहीं छाप सकते है और ना ही किसी अन्य पोशाक के रूप में इस्तेमाल कर सकते हैं.

अभियान में इस तरह कराएं पंजीकरण
इस अभियान का हिस्सा बनने की इच्छा रखने वाले लोग harghartiranga.com पर अपनी फोटो अपलोड कर सकते हैं. इसी वेबसाइट से हर घर तिरंगा अभियान में भाग लेने का सर्टिफिकेट डाउनलोड कर सकते हैं. जानकारी के मुताबिक 1 अगस्त को ही 50 लाख लोगों ने घरों पर फहराए गए तिरंगे की फोटो वेबसाइट पर अपलोड की, तो 7 लाख से अधिक तिरंगे के साथ सेल्फीज भी अपलोड की गईं. हर घर तिरंगे अभियान का सर्टिफेकिट इस तरह वेबसाइट से डाउनलोड किया जा सकता है.

  • harghartiranga.com की ऑफिशियल वेबसाइट पर जाएं.
  • अपनी प्रोफाइल फोटो का चयन करें.
  • अपना नाम और संपर्क करने से जुड़ी जानकारी भरें. यह काम आप अपने गूगल अकाउंट से भी कर सकते हैं.
  • वेबसाइट को अपने घर की लोकेशन जानने दें.
  • फिर वेबसाइट पर तिरंगा अटैच कर दें.
  • अपनी लोकेशन की जानकारी पूरी तरह से अपलोड हो जाने के बाद सर्टिफिकेट को डाउनलोड कर लें.

राज्य सरकार अभियान के प्रचार-प्रसार में क्या कर रहीं
कुछ राज्यों ने हर घर तिरंगा अभियान को सफल बनाने के लिए अपनी तरफ चित्र ध्वज से भी व्यावहारिक और ठोस कदम उठाए हैं. महाराष्ट्र सरकार ने कॉपरेटिव संस्थाओं समेत राज्य सरकारों की अन्य विभागों को सुनिश्चित चित्र ध्वज करने को कहा है कि प्रत्येक हाउसिंग सोसाइटी में तिरंगा फहराया जाए. इसके अलावा सरकारी और अर्ध-सरकारी इमारतों के लिए भी यही नियम लागू किया है. स्वतंत्रता दिवस पर आगरा के स्थानीय प्रशासन से जुड़े अधिकारियों ने दावा किया है कि चित्र ध्वज 20 करोड़ घरों पर तिरंगा फहराया जाएगा. बोंगाईगांव के एक टेक्सटाइल कारखाने को तिरंगा बनाने का जिम्मा सौंपा गया है और वह दिन-रात काम कर इस अभियान के तहत दिए गए लक्ष्य को पूरा करने के प्रयास में युद्धस्तर पर लगी हुई है.

‘उल्टे तिरंगे’ पर विपक्ष ने जमकर घेरा, वायरल फोटो के बाद जानिए क्या बोले शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत

राष्ट्रीय ध्वज- तिरंगा के साथ शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत का ऐसा फोटो वायरल हो गया, जिसने घंटों राजनीतिक माहौल गरमाए रखा। मंत्री द्वारा पकड़ा तिरंगा फोटो में उल्टा नजर आ रहा है।

‘उल्टे तिरंगे’ पर विपक्ष ने जमकर घेरा, वायरल फोटो के बाद जानिए क्या बोले शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत

राष्ट्रीय ध्वज- तिरंगा के साथ शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत का ऐसा फोटो वायरल हो गया, जिसने घंटों राजनीतिक माहौल गरमाए रखा। मंत्री द्वारा पकड़ा तिरंगा फोटो में उल्टा नजर आ रहा है। सोशल मीडिया पर रावत का फोटो आते ही कांग्रेस को भी बैठे-बिठाए मुद्दा मिल गया। बीते रोज हरिद्वार में एक कार्यक्रम में प्रदेश के तमाम दिग्गज मौजूद थे।

जिसमें मंत्री धन सिंह रावत के हाथ में चित्र ध्वज तिरंगा उलटा नजर आया। मीडिया में यह फोटो आने पर सुबह से कांग्रेस ने इस पर सवाल उठाने शुरू कर दिए। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष करन माहरा एवं पूर्व प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने कहा कि, यह राष्ट्रीय ध्वज के अपमान का विषय है। कोई आम आदमी हो तो भी बात अलग थी।

मंत्री के हाथ में यदि इस प्रकार उल्टा तिरंगा होगा तो क्या संदेश जाएगा? उन्होंने रावत से सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग की। शाम को शिक्षा मंत्री की ओर से जारी बयान में कहा गया कि एक समाचार पत्र में प्रकाशित छायाचित्र को विपक्ष के लोगों द्वारा सोशल मीडिया पर अनावश्यक मुद्दा बनाकर लोगों को गुमराह किया जा रहा है।

हरिद्वार स्थित पतंजलि योगपीठ में आयोजित हुए कार्यक्रम में अतिथियों को राष्ट्रीय ध्वज वितरित करते समय ‘तिरंगे’ के निचले हिस्से को उलटकर मेरे द्वारा सही किया जा रहा था। तभी किसी छायाकार द्वारा हमारा छायाचित्र ले लिया गया और उसे प्रकाशित कर दिया। जबकि, बाकी के कार्यक्रम के सही फोटो प्रकाशित किए गए हैं।

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