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नए निवेशकों को शेयर ट्रेडिंग कैसे करनी चाहिए?

नए निवेशकों को शेयर ट्रेडिंग कैसे करनी चाहिए?
शेयर बाजार 11 घंटे पहले (14 नवंबर 2022 ,14:45)

Grey Market में किस IPO का क्या चल रहा भाव? जानिए आपको फायदा होगा या नुकसान?

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो

by बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो ।।
Published - Sunday, 13 November, नए निवेशकों को शेयर ट्रेडिंग कैसे करनी चाहिए? 2022

GMP IPO

नई दिल्ली: जब भी कोई निवेशक किसी कंपनी के IPO में अप्लाई करता है तो उसकी नजर Grey Market पर जरूर रहती है. उसे देखने के बाद वह, खासकर रिटेल इन्वेस्टर्स यह तय करते हैं कि उन्हें किस कंपनी के IPO में अप्लाई करना चाहिए और किसमें नहीं. आइए, सबसे पहले यह समझते हैं कि आखिर ये Grey Market होता क्या है?

क्या होता है IPO ग्रे-मार्केट
शेयर बाजार में जो ट्रेडिंग होती है उसकी निगरानी मार्केट रेगुलेटर सेबी करता है, इसे White Market कहते हैं, क्योंकि ये कानून के दायरे में होता है. दूसरी तरफ कुछ बिजनेस काले धंधे या Black Market होते हैं, जो कानून की नजर में गलत होते हैं, जैसे कोई चीज स्मगलिंग या चोरी करके बेची जाए, लेकिन इन सबके बीच में एक ग्रे एरिया होता है, जो न तो White Market के दायरे में आता है और न Black Market के दायरे में. यानी न तो वो कानूनी है और न ही गैर-कानूनी. बस वो रेगुलेटेड नहीं है. ठीक ऐसे ही होते हैं IPO ग्रे मार्केट, जिसमें शेयरों की ट्रेडिंग तो होती है, लेकिन उन पर सेबी के नियम लागू नहीं होते. सेबी के नियम लिस्टेड कंपनियों पर ही लागू होते हैं, लेकिन अगर कोई IPO लिस्ट ही नहीं हुआ तो उस पर सेबी के नियम लागू नहीं हो सकते.

ग्रे-मार्केट निवेशकों के लिए कैसे मददगार है?
ग्रे मार्केट और कुछ नहीं बल्कि एक संकेत होता है कि कोई शेयर लिस्ट होने के बाद कैसा परफॉर्म करेगा. यदि कोई शेयर ग्रे-मार्केट में IPO Price ने नीचे ट्रेड कर रहा होता है तो उसकी परफॉर्मेंस अच्छी नहीं मानी जाती है और जो IPO Price से ऊपर ट्रेड कर रहा होता है, उसके प्रति रिटेल इन्वेस्टर्स अट्रैक्ट होते हैं. भले ही ग्रे-मार्केट आधिकारिक नहीं है, लेकिन गैर-कानूनी भी नहीं है.

किस कंपनी के IPO का ग्रे-मार्केट में क्या चल रहा भाव
- Fusion Micro Finance का IPO Price 368 रुपये है और इसका GMP 5 रुपये अधिक चल रहा है.
- Global Health का IPO Price 336 रुपये है और इसका GMP 20 रुपये अधिक चल रहा है.
- Bikaji Foods का IPO Price 300 रुपये है और इसका GMP 35 रुपये अधिक चल रहा है.
- Archeran Chemicals का IPO Price 407 रुपये है और इसका GMP 80 रुपये अधिक चल रहा है.
- Five Star Business Finance का IPO Price 474 रुपये है और इसका GMP 5 रुपये अधिक चल रहा है.
- Kaynes Technology का IPO Price 587 रुपये है और इसका GMP 85 रुपये अधिक चल रहा है.
- Inox Green Energy का IPO Price 65 रुपये है और इसका GMP 10 रुपये अधिक चल रहा है.
- Daps Advertising का IPO Price 30 रुपये है और इसका GMP 8 रुपये अधिक चल रहा है.
- Vital Chemtech का IPO Price 101 रुपये है और इसका GMP 80 रुपये अधिक चल रहा है.
- Amiable Logistics का IPO Price 81 रुपये है और इसका GMP 55 रुपये अधिक चल रहा है.

IPO ग्रे-मार्केट कैसे काम करता है
आमतौर पर IPO ग्रे-मार्केट तब एक्टिव होता है जब कोई कंपनी अपना IPO लाने का ऐलान करती है और उसका प्राइस बैंड तय करती है. प्राइस बैंड तय होने और लिस्टिंग के बीच में करीब 10-12 दिन का वक्त होता है, इस अवधि के दौरान भी ग्रे मार्केट में शेयरों की ट्रेडिंग शुरू हो जाती है, भले ही IPO शेयर मार्केट में लिस्ट न हुआ हो. इस दौरान IPO एप्लीकेशन को खरीदा या बेचा जाता है, अगर किसी को शेयर अलॉट हो जाते हैं तो भी उन शेयरों को एडवांस में ही खरीदा और बेचा जाता है. इसको ऐसे समझिए कि इसमें कोई सेलर IPO अलॉटमेंट के लिए एप्लीकेशन देता है, तो दूसरी ओर कोई खरीदार इश्यू की लिस्टिंग से पहले ही इश्यू प्राइस से ज्यादा पैसे देकर उन शेयरों को खरीदना चाहता है. ये सौदा बीच में मौजूद एक डीलर करवाता है. डीलर सेलर से कॉन्टैक्ट करके उन शेयरों को प्रीमियम पर ग्रे मार्केट में बेचने को कहता है. अगर नए निवेशकों को शेयर ट्रेडिंग कैसे करनी चाहिए? सेलर लिस्टिंग के खतरे को मोल नहीं लेना चाहता और एक फिक्स मुनाफा कमाकर निकल जाना चाहता है तो वो शेयरों को एक फिक्स्ड अमाउंट पर ग्रे मार्केट में बेचने के लिए राजी हो जाता है. इसके बाद डीलर बायर को ये बताता है कि उसने शेयरों को सेलर से खरीद लिया है. ये शेयर बायर को ट्रांसफर कर दिए जाते हैं. अब इसके बाद बायर की मर्जी कि लिस्टिंग के बाद वो उन शेयरों को रखता है या बेच देता है.

लोग ग्रे मार्केट में ट्रेड क्यों करते हैं
जब कोई IPO बाजार में आने वाला होता है तो लोगों में उसे लेकर काफी उत्सुकता रहती है, खासतौर पर तब जब कोई बड़ा IPO आता है. जैसे कि मान लीजिए कि Paytm का IPO. लोगों को लगता है कि अगर ये इश्यू बाजार में आएगा तो काफी अच्छा लिस्ट होगा, तो क्यों न इसे लिस्टिंग से पहले ब्लॉक करके रख लिया जाए. मान लीजिए कि शेयर का इश्यू प्राइस 1000 रुपये है और उसे ग्रे मार्केट में 20 रुपये प्रति शेयर के प्रीमियम पर खरीदा गया और शेयर 40 रुपये के प्रीमियम पर लिस्ट हुआ है तो निवेशक को 20 रुपये प्रति शेयर का फायदा हो जाएगा.

ग्रे-मार्केट के खतरे
सबसे बड़ा खतरा तो ये है कि ये सेबी के दायरे में नहीं आता है, इसमें सबकुछ जुबानी होता है कुछ भी कॉन्ट्रैक्ट लिखित में नहीं होता है. इसलिए कब कोई मुकर जाए, इसका खतरा हमेशा बना रहता है. हालांकि सेलर और बायर के बीच में हमेशा एक डीलर होता है जो ये दोनों के बीच में इस डील को कराता है और ये सुनिश्चित कराता है कि किसी भी तरह की गड़बड़ी न हो पाए.

क्या होता है ग्रे-मार्केट प्रीमियम
ग्रे मार्केट का पूरा कामकाज ही प्रीमियम की धुरी पर घूमता है. इसे समझने के लिए एक उदाहरण लेते हैं. मान लीजिए किसी कंपनी ABC ने अपना नए निवेशकों को शेयर ट्रेडिंग कैसे करनी चाहिए? IPO लाने का ऐलान किया, इश्यू प्राइस तय किया 1000 रुपये, 15 शेयरों का लॉट है.

ग्रे मार्केट का कोई खरीदार इसे 300 रुपये ज्यादा देकर पर भी लेने को राजी है, उसे लगता है कि ये करीब 1600 रुपये प्रति शेयर के ऊपर ही लिस्ट होगा, इसलिए उसे कम से कम 300 रुपये प्रति शेयर का फायदा हो जाएगा. ऐसे में वो खरीदार किसी विक्रेता से 300 रुपये के प्रीमियम पर शेयर खरीदने की डील कर लेता है. इसमें विक्रेता को एक लॉट पर 300X15 यानी 4500 रुपये का फिक्स प्रॉफिट मिल जाता है. जब भी शेयर लिस्ट होगा विक्रेता को 15 शेयर खरीदार को ट्रांसफर करने होंगे. ऐसे में जो ग्रे मार्केट प्रीमियम होगा वो 300 रुपये होगा. मगर विक्रेता को ये लगता है कि इश्यू की लिस्टिंग काफी अच्छी हो सकती है और 300 रुपये का प्रीमियम कम है, इसे 500 रुपये होना चाहिए तो यहीं से शुरू होता है डिमांड और सप्लाई का खेल, और तय होता है ग्रे मार्केट का प्रीमियम.

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शेयर खरीदने के नियम – Rules for buying shares

अगर आप भी निवेश करके नए निवेशकों को शेयर ट्रेडिंग कैसे करनी चाहिए? पैसा कमाना चाहते हैं तो सबसे पहले आपको शेयर खरीदने के नियम पता होने चाहिए। लेकिन शेयर खरीदने से पहले आपको पता होना चाहिए कि शेयर मार्केट क्या है?

शेयर मार्केट वह जगह है जहां शेयर खरीदे और बेचे जाते है। शेयर मार्केट आपको इक्विटी, बॉन्ड, म्यूचुअल फंड, डेरिवेटिव इत्यादि में ट्रेडिंग करने के लिए एक प्लेटफॉर्म प्रदान करता है।

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किसी भी नए या अनुभवी निवेशक को निवेश करने के लिए पता होना चाहिए कि शेयर खरीदने के लिए क्या करें, किस कंपनी का शेयर खरीदे और शेयर खरीदने के नियम क्या हैं?

Table of Contents

शेयर कैसे खरीदें ?

सबसे पहले आपको यह जानना होगा कि शेयर खरीदते समय आपको किन किन बातों को ध्यान में रखना है। यहाँ हमनें कुछ टिप्स बताए हैं, जो एक निवेशक के लिए निवेश करने से पहले दिमाग में रखना जरूरी है।

अपने फाइनेंशियल उद्देश्यों को ध्यान में रखें।

मौलिक और तकनीकी विश्लेषण करें।

सही कीमत पर शेयर खरीदें।

समय-समय पर निवेश करें सेबी के नियमों का पालन करें चलिए

अब इन सब पर एक-एक करके चर्चा करते हैं।

अपने फाइनेंशियल उद्देश्यों को ध्यान में रखें – Keep your financial objectives in mind

शेयर खरीदने के नियम में सबसे पहला नियम या टिप्स यह है कि शेयर खरीदने से पहले हमें अपने उद्देश्यों को ध्यान में रखना चाहिए। इसका मतलब है कि सबसे पहले यह सुनिश्चित करें कि आपको लॉन्ग-टर्म निवेश करना है या शॉर्ट टर्म इन्वेस्टमेंट करना है।

शॉर्ट टर्म ट्रेडर इंट्राडे ट्रेडिंग या स्विंग ट्रेडिंग को चुनते हैं। वहीं लॉन्ग-टर्म के लिए निवेशक डिलीवरी ट्रेडिंग या पोज़िशनल ट्रेडिंग का विकल्प चुन सकते हैं।

यदि आप शॉर्ट-टर्म यानी कम अवधि में के जरिये रिटर्न प्राप्त करना चाहते है, तो आप निवेश के अन्य साधनों पर विचार कर सकते हैं। हालांकि, अगर आपके पास लॉन्ग टर्म इन्वेस्टमेंट का प्लान है, तो इक्विटी में निवेश करने से आपको बेहतरीन रिटर्न मिल सकता है।

शेयर खरीदने के नियम - Rules for buying shares

लॉन्ग टर्म में निवेशक एक कंपनी के शेयर खरीदते हैं जब यह सस्ता होता है, और जब उन्हें लगता है कि स्टॉक की कीमत पर्याप्त रूप से बढ़ गई है, तो वे शेयरों को अधिक कीमत पर बेचना शुरू करते हैं।

इस तरह की ट्रेडिंग में जोखिम कम होता है। इसके विपरीत शॉर्ट-टर्म ट्रेड में इंट्राडे ट्रेड होता है। इसमें अगर सही स्टॉक की पहचान हो जाए तो शेयर बाजार में दैनिक आधार पर पैसा लगाकर मुनाफा कमाया जा सकता है।

लेकिन ध्यान रहे कि इसमें जोखिम भी काफी होता है। इसलिए, स्टॉक मार्केट को शॉर्ट टर्म मनी मेकिंग टूल के रूप में सोचने के बजाय, इसे लॉन्ग-टर्म इन्वेस्टमेंट ऑप्शन के रूप में देखें।

मौलिक और तकनीकी विश्लेषण करें – Perform fundamental and technical analysis

यह भी शेयर खरीदने के नियम में से एक बहुत ही महत्वपूर्ण नियम है। स्टॉक मार्केट में अंधाधुंध शेयर खरीदना, बिना सही रिसर्च या एनालिसिस के अपने पैर पर कुल्हाड़ी मारने जैसा है।

इससे पहले कि आप शेयर मार्केट में निवेश करें, आपको यह समझने में कोशिश करनी चाहिए कि शेयर बाजार कैसे काम करता है। किसी विशेष कंपनी के शेयर खरीदते समय, कंपनी के पिछले प्रदर्शन के साथ-साथ भविष्य की संभावनाओं पर कुछ रिसर्च करना आवश्यक है।

इसी प्रकार, शेयर खरीदने से पहले मार्केट ट्रेंड की जाँच करें और यह जानें कि शेयर मार्केट की स्थिति पहले कैसी थी और अभी कैसे चल रही है। इसके आधार पर ही शेयर खरीदें।

शेयर खरीदने के नियम - Rules for buying shares

वह आपको शेयर खरीदने का फैसला लेने में आपकी मदद करेंगे।

सही कीमत पर शेयर खरीदें – buy shares at the right price

उस कीमत पर स्टॉक खरीदना बहुत महत्वपूर्ण है जो आप देने में सक्षम हो। हो सकता है कि आप ऐसे शेयर को ढूंढ रहे हो जो बहुत लोकप्रिय है और जिसे दूसरे लोग खरीद रहे हैं।

लेकिन इसके लिए आपको यह भी देखना होगा कि अपने बजट के अनुसार शेयर खरीदे और जो आपको बेहतर रिटर्न दे सके। जो शेयर आपके बजट में फिट नहीं बैठता, आप उसे छोड़ दें।

सही समय की प्रतीक्षा करें और उस स्टॉक को चुनें, जो आपके बजट में फिट हो और आपको लाभ भी दे। इसके अलावा, जब आपको लगे कि आप अपना स्टॉक बेचना चाहते हैं और आपको अच्छा रिटर्न मिल रहा है

तब आपको शेयर बेच देने चाहिए। शेयर की कीमत को कुछ और बढ़ाने के लिए इंतजार करना फायदेमंद हो सकता है।

लेकिन ध्यान रहे कि अगर इसका प्राइस नीचे जाता है तो आपको नुकसान भी हो सकता है। इसलिए, शेयर हमेशा सही समय पर खरीदें और सही समय आने पर बेच दें।

सेबी के नियमों का पालन करे – Follow SEBI rules

शेयर मार्केट की रेगुलेटरी बॉडी ने 1 सितंबर 2020 से शेयर खरीदने और बेचने के नियमों में भारी बदलाव किए हैं। एक तरफ जहां इन नियमों के कारण निवेशकों की सुरक्षा बढ़ी हैं, वहीं दूसरी ओर शेयर खरीदना मुश्किल हो गया है।

जैसा कि आपको पता है कि “कार्वी ऑनलाइन” ने निवेशकों के पैसों के साथ घोटाला किया था। उसके बाद सेबी ने नियम बनाने के लिए कड़े कदम उठाए। ऐसे में अगर आप शेयर खरीदना चाहते हैं तो आपको शेयर खरीदने के नियम पता होने चाहिए।

आपको पता है कि निवेशक अपने ब्रोकर से पॉवर ऑफ अटॉर्नी लेते थे। यहाँ ब्रोकर उनके शेयर के साथ मनमानी करते थे और निवेशकों की बिना सहमति के शेयर्स का इस्तेमाल करते थे।

लेकिन अब सेबी के नए में शेयर आपके डीमैट खाते नए निवेशकों को शेयर ट्रेडिंग कैसे करनी चाहिए? में ही रहेंगे और वहीं पर क्लियरिंग हाउस प्लेज मार्क कर देगा। इस तरह ब्रोकर के अकाउंट में आपके शेयर नहीं जाएंगे।

मुख्य बातें – Headlines

आपको सबसे पहले अपने दिमाग में एक वित्तीय उद्देश्यों को रखें, यानी सबसे पहले यह तय करें कि आपको लॉन्ग-टर्म इन्वेस्टमेंट करना है या शॉर्ट टर्म निवेश करना है।

यदि आपकी जोखिम क्षमता कम है तो आपको लॉन्ग टर्म इन्वेस्टमेंट की तरफ रुख करना चाहिए। इसमें समय अधिक लगेगा लेकिन यह आपको एक अच्छा रिटर्न दे सकता है।

आप कंपनी का फंडामेंटल एनालिसिस करके उस कंपनी के बारे में बारीकी से जान सकते हैं जिस कंपनी के शेयर आप खरीदना चाहते हैं। इसके जरिए कंपनी के बिजनेस, कंपनी क्या Product बनाती है, मार्केट में प्रोडक्ट की डिमांड कितनी है, Company Profit में है या Loss में, Company पर कर्ज कितना है

आदि के बारे में आप जान सकते हैं। आपको शेयर खरीदने के लिए एक सही प्राइस का इंतजार करना चाहिए। यानी अगर शेयर की कीमत आपके बजट से बाहर है तो आपको सही समय की प्रतीक्षा करने के बाद ही शेयर खरीदना चाहिए।

इसके साथ ही हमेशा उसी पैसे का इस्तेमाल करें जो आपके पास एक्स्ट्रा हो और कभी भी अपनी मेहनत की पूरी कमाई का उपयोग निवेश में नहीं करना चाहिए।

शेयर खरीदने के नियम - Rules for buying shares

समय-समय पर निवेश करें यानि हमेशा वोलैटिलिटी को ध्यान में रख कर ही शेयर खरीदें।

इसके अलावा, सेबी के नए नियमों का भी कड़ाई से पालन करें। इस प्रकार, यदि आप शेयर खरीदने के लिए इन नियमों का पालन करते हैं तो आप एक बेहतर रिटर्न प्राप्त कर सकते हैं।

अगर आप भी शेयर मार्केट में ट्रेड करना चाहते है तो आपके पास डीमैट खाता होना चाहिए।

पीएम की भागीदारी और संवैधानिक स्थिति, भारत में ईसीसीई के उत्थान की कुंजी : पेंसिल पावर रिपोर्ट

शेयर बाजार 11 घंटे पहले (14 नवंबर 2022 ,14:45)

पीएम की भागीदारी और संवैधानिक स्थिति, भारत में ईसीसीई के उत्थान की कुंजी : पेंसिल पावर रिपोर्ट

© Reuters. पीएम की भागीदारी और संवैधानिक स्थिति, भारत में ईसीसीई के उत्थान की कुंजी : पेंसिल पावर रिपोर्ट

मुंबई, 14 नवंबर (आईएएनएस)। स्क्वेयरपांडा इंडिया की पेंसिल पावर रिपोर्ट (पीपीआर) का पहला संस्करण, जिसे न्यूरोसाइंटिस्ट, क्षेत्र के विशेषज्ञों और चिकित्सकों द्वारा संकलित किया गया है, बाल दिवस पर जारी किया गया।यह स्क्वेयर पांडा के हेड ग्लोबल ऑपरेशंस आशीष झालानी के दिमाग की उपज है, जिन्होंने दिसंबर 2021 में द स्टेट ऑफ फाउंडेशनल लिटरेसी एंड न्यूमरेसी इन इंडिया शीर्षक से पीएम की आर्थिक सलाहकार परिषद द्वारा जारी एक रिपोर्ट का सह-लेखन भी किया था।

पीपीआर पूरी तरह से समाधान केंद्रित प्रयास है। पीपीआर की प्रस्तावना प्रसिद्ध लॉन टेनिस खिलाड़ी और स्क्वायर पांडा के अध्यक्ष आंद्रे अगासी द्वारा लिखी गई है।

वह कहते हैं, निजी क्षेत्र में शिक्षा प्राप्त करने वाले 25 प्रतिशत बच्चों पर प्रभाव की मात्रा के अनुपात में बहुत अधिक ध्यान दिया जाता है। हालांकि, अगर हम एक अरब की तीन तिमाहियों को प्रभावित करना चाहते हैं जो 25 प्रतिशत संपन्न लोगों की छाया में रहते हैं, तो हमें एक ऐसी प्रणाली के बारे में सोचना होगा जो स्थानीय चैंपियन को अकेले स्थानीय चैंपियन की पहल पर निर्भर होने के बजाय प्लग एंड प्ले करने में सक्षम बनाता है।

स्क्वायर पांडा इंडिया के प्रेसिडेंट इंटरनेशनल मार्केट्स और मैनेजिंग डायरेक्टर आशीष झालानी ने भारत में ईसीसीई के भविष्य के पाठ्यक्रम की रूपरेखा तैयार करने के लिए देश के कुछ टॉप माइन्ड्स को शामिल किया है।

झालानी ने कहा, हमारी रिपोर्ट दिसंबर 2021 में पीएम की आर्थिक सलाहकार परिषद द्वारा जारी द स्टेट ऑफ फाउंडेशनल लिटरेसी एंड न्यूमेरसी इन इंडिया के साथ पूरी तरह से मेल खाती है। पीपीआर में डॉ. वेनिता कौल, डॉ. वेरा ब्लाउ मैककैंडलिस, डॉ. प्रभात रंजन, डॉ. नंदिनी चटर्जी सिंह, डॉ. संध्या संगई, डॉ रोमिला सोनी, रेवती रमन विशेवर, डॉ शकीला शम्सू और डॉ श्रीरंजन जैसे दिग्गजों का योगदान है। रिपोर्ट इस बात पर जोर देती है कि प्रधानमंत्री को भारत में ईसीसीई का प्रमुख प्रस्तावक होना चाहिए और इसे संवैधानिक अधिकार बनाया जाना चाहिए।

प्रमुख अनुशंसाओं में निम्न शामिल हैं :

एक आत्मनिर्भर ईसीसीई वास्तुकला का निर्माण : इसे भारत की सार्वजनिक शिक्षा प्रणाली में, हर राज्य और हर स्कूल तक पहुंचा जा सकता है।

प्रधानमंत्री को राष्ट्रीय बाल विकास परिषद का नेतृत्व और अध्यक्षता करनी चाहिए और भारत में ईसीसीई का प्रमुख प्रवर्तक होना चाहिए। राज्य स्तर तक, मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाली एक कार्यकारी समिति के साथ ईसीसीई की एक सीएम परिषद की स्थापना की जा सकती है। इन समितियों के सदस्यों में शिक्षा, समाज कल्याण, स्वास्थ्य, आदिवासी मामले, विकलांगता मामले और बाल विकास और पोषण और संबंधित पहलुओं के मंत्री और संबंधित राज्य सचिव शामिल हो सकते हैं।

ईसीसीई को एक संवैधानिक अधिकार दिया जाना चाहिए : जैसा कि विधि आयोग की रिपोर्ट संख्या 259 द्वारा निष्कर्ष निकाला गया है और सिफारिश की गई है, ईसीसीई को सभी बच्चों के लिए देखभाल, सहायता और शिक्षा का संवैधानिक अधिकार बनाया जाना चाहिए, जिसमें जन्म से लेकर छह वर्ष की आयु तक (और अब प्रारंभिक शिक्षा 8 वर्ष की आयु तक जारी है) शिक्षा शामिल है।

बुजुर्ग आबादी को ईसीसीई स्वयंसेवकों में परिवर्तित करना : बुजुर्गो को बाल देखभाल प्रथाओं, कहानी कहने, लोक और परिचित गीतों, उत्तेजक ग्राफिक्स, लोक कलाकारों और शिल्प-व्यक्तियों, वैज्ञानिकों, खिलाड़ियों, प्रकृतिवादियों, समाज के सभी वर्ग को प्रत्येक बच्चे के साथ खेलने, रोमांचित करने और आनंद लेने के लिए सभी को शामिल करना दिलचस्प हो सकता है।

डिजिटल प्रशिक्षण संसाधनों को बढ़ाना : सभी राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को अपनी वेबसाइट पर आवश्यक ईसीसीई सामग्री अपलोड करनी होगी और साथ ही प्रत्येक ईसीसीई केंद्र में अनुमोदन, प्रिंट और प्रदान करना होगा। राज्य/संघ राज्य क्षेत्र में आयोजित प्रत्येक प्रशिक्षण कार्यक्रम में ईसीसीई पर एक सत्र आयोजित किया जाना चाहिए।

सभी राज्यों में चाइल्डकैअर प्रोफेशनल कैडर रखना : इस कैडर को बच्चों की देखभाल, शैक्षणिक सहायता और समग्र विकास पर अधिक ध्यान देना चाहिए और अवशिष्ट प्रशासनिक कार्यो पर कम ध्यान देना चाहिए।

रिपोर्ट प्रासंगिक प्रश्न भी उठाती है जैसे-

जब हम विकासात्मक अक्षमताओं वाले अन्य लोगों को समायोजित करने का प्रयास करते हैं, तो क्या सिस्टम में प्रतिभाशाली बच्चे पीड़ित होते हैं? प्रत्येक बच्चा रास्ता कैसे खोजता है?

यूट्यूब जैसे प्लेटफॉर्म पर पर्याप्त शैक्षिक सामग्री मुफ्त में उपलब्ध है।

उस तरह एक प्रौद्योगिकी वास्तुकला की कल्पना करो, जहां देश भर के शिक्षकों द्वारा कई भाषाओं में एक लॉगिन और पासवर्ड के साथ पाठों को स्तरित और वर्गीकृत किया जाता है और स्वतंत्र रूप से एक्सेस किया जाता है।

झालानी ने निष्कर्ष निकाला, रिपोर्ट आशा का प्रतीक है और स्वीकार करती है कि हमारे पास एक बहुत ही प्रगतिशील सरकार है, जो कार्यान्वयन में सक्षम है।

शेयर मार्केट क्या है? जाने पूरी जानकारी हिंदी में

Share market

Share market या Stock market एक ऐसी जगह है जहां पर आप अपने पैसे को निवेश (Investment) करके बहुत अच्छी कमाई कर सकते हैं। शेयर मार्केट पूरी तरह से देश की अर्थव्यवस्था, वैश्विक संकेतों, मुद्रा और आरबीआई की नीतियों आदि पर निर्भर करता है। Stock Market में अलग-अलग कंपनियों के नाम से शेयर होते हैं। इसमें इन्वेस्ट करते समय नए निवेशकों को शुरुआत में दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। लेकिन जब वही निवेशक Share market को अच्छी तरह से समझने लगता है तब उसको इसमें काफी लाभ मिलने लगता है।

स्टॉक मार्केट में कमाई के कई क्षेत्र

स्टॉक मार्केट में अलग-अलग तरह के सेक्टर होते हैं।

  1. ऑयल,
  2. रियल इस्टेट,
  3. बैंकिंग,
  4. स्टील,
  5. पावर,
  6. संचार
  7. कंज्यूमर गुड्स,
  8. मेटल

यह कुछ ऐसे क्षेत्र हैं जहां पर निवेशक अपनी पसंद के अनुसार निवेश कर सकता है।

किस कंपनी में निवेश करना चाहिए, सावधानी

अगर किसी निवेशक को अपनी पसंदीदा कंपनी चुननी है तो सबसे पहले उसे कंपनी के बारे में जानना होगा। बैलेंस शीट (Balance sheet) के साथ-साथ क्या है उस कंपनी का टर्नओवर (Turnover) उसके बारे में भी निवेशक को जानकारी हासिल करनी चाहिए।

मोनीकंट्रोल (www.moneycontrol.com) की वेबसाइट पर जाकर बेलेन्स शीट और टर्नओवर चेक कर सकते है।

बेस्ट सेक्टर चुने

शेयर मार्केट निवेशकों के सामने ऐसे बहुत सारे सेक्टर होते हैं जहां पर वह निवेश कर करता है। इन सेक्टरों में कौन सा सबसे अच्छा क्षेत्र होगा जो निवेशकों को छोटी और लंबी अवधि में बेहतर रिटर्न दे सके इस बात को बता पाना किसी के लिए भी मुश्किल भरा काम है। यह काम और अधिक मुश्किल हो जाता है जब देश की अर्थव्यवस्था सही न हो और विश्व आर्थिक संकट से गुजर रहा हो। ऐसे स्थिति में विशेषज्ञों की सलाह होती है कि मिड कैप स्टॉक को चुनें क्योंकि ऐसी परिस्थितियों में लार्ज कैप स्टॉक बहुत ही ज्यादा गोता लगाते हैं।

शेयर मार्केट में कैसे निवेश करे

निवेश करने वाले व्यक्ति के मन में पहला सवाल होगा कि शेयर मार्किट में निवेश कैसे किया जाए ? सबसे पहले ये तय करें कि आप जो भी निवेश करना चाह रहे हैं। उसकी आपको जरूरत कब है इसमें समय का ज्यादा महत्व होता है, क्योंकि इससे आप लंबी और छोटी अवधि के शेयरों का चुनाव कर सकते हैं। निवेश करने के लिए आप जिस कंपनी का शेयर लेंगे उसके बारे में आप अच्छी तरह से जानकारी कर लें। इसके लिए आप शेयर मार्केट सलाहकारों की मदद ले सकते हैं। यह जरूरी नहीं है कि आप एक ही कंपनी में निवेश करें। आप एक से अधिक कंपनियों में भी निवेश कर सकते हैं.

स्टॉक मार्केट के लिए डीमैट अकाउंट है जरूरी

शेयर मार्केट में निवेश के लिए आपके पास डीमैट अकाउंट होना जरूरी है इसके लिए आपको किसी भी बैंक, रिलायंस मनी और इंडिया इन्फोलाइन जैसी शेयर ब्रोकरेज कंपनियों से संपर्क करना पड़ेगा। आजकल के दौर में आप आसानी से किसी भी बैंक से डीमेट अकाउंट खुलवा सकते है।

कुछ समय पहले तक शेयरों की फिजिकल ट्रेडिंग होती थी। इसमें शेयर सीधे ट्रांसफर होते थे। पर अब ऐसा नहीं है। अब इनकी खरीद-बिक्री किसी बैंक या वित्तीय संस्थान के डीमैट खाते (Demat account) के जरिए होती है। आप खुद या आपके स्थान पर कोई शेयर ब्रोकिंग कंपनी शेयरों की खरीद-बिक्री कर सकती है। जैसे म्यूचुअल फंड (mutual fund)

निवेश की अवधि कितनी होनी चाहिए

निवेशक निवेश करने के लिए दो तरह के तरीकों को अपना सकते हैं। लंबी और छोटी अवधि के लिए निवेश. छोटी अवधि में खरीदे गए शेयर को निवेशक 3 से 6 महीने के लिए अपने पास रख सकते हैं। जबकि लंबी अवधि में खरीदे गए शेयर को 6 महीने से ऊपर तक अपने पास रख नए निवेशकों को शेयर ट्रेडिंग कैसे करनी चाहिए? सकते है। आम निवेशकों को सलाह दी जाती है कि लंबी अवधि का निवेश सही रहता है क्योंकि डे-ट्रेडिंग और छोटी अवधि के निवेश ज्यादा जोखिम भरे होते हैं।

आजकल शेयरों की ट्रेडिंग इलेक्ट्रॉनिक तरीके से होती है. यह प्रक्रिया BSE (बंबई स्टॉक एक्सचेंज) और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) के जरिए की जाती है।

शेयर खरीदने का मतलब क्या होता है?

मान लीजिये कि NSE में सूचीबद्ध किसी कंपनी ने कुल 15 लाख शेयर जारी किए हैं। आप उस कंपनी के प्रस्ताव के अनुसार जितने शेयर खरीद लेते हैं आपका उस कंपनी में उतने हिस्से के मालिक बन जाते है। आप अपने हिस्से के शेयर किसी अन्य खरीदार को जब भी चाहें बेच सकते हैं।

कोई कंपनी BSE/NSE स्टॉक में कैसे लिस्ट होती है?

स्टॉक मार्केट (Stock Market) में लिस्ट होने के लिए कंपनी को शेयर बाजार से लिखित समझौता करना पड़ता है। इसके बाद कंपनी पूंजी बाजार नियामक SEBI के पास अपने सभी जरूरी दस्तावेज जमा करती है। SEBI की जांच में सूचना सही होने और सभी शर्त के पूरा करते ही कंपनी National Stock Exchange और Bombay Stock Exchange में लिस्ट हो जाती है। कंपनी लिस्ट होते ही आप कंपनी के शेयर खरीद सकते है।

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