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बढ़ती महंगाई से बिगड़ा घरों का बजट, ऑटो चालकों ने दी अनिश्चितकालीन हड़ताल की धमकी

नयी दिल्ली, 12 अप्रैल (भाषा) बीते कुछ महीनों से आवश्यक वस्तुओं और ईंधन के मूल्य में लगातार हो रही वृद्धि के कारण के आम लोगों के घर का बजट पूरी तरह से गड़बड़ा गया है और समाज का लगभग हर वर्ग इससे परेशानी महसूस कर रहा है।

जहां एक ओर सब्ज़ियों के दाम आसमान छू रहे हैं, वहीं पिछले एक महीने में पेट्रोल और डीजल के दाम में 10 रुपए प्रति लीटर तक वृद्धि हुई है। इसके अलावा, पिछले कुछ दिनों में रसोई गैस सहित अन्य पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों में भी वृद्धि देखी गई है, जिससे लोगों की परेशानी बढ़ गई है।

पंजाब के फगवाड़ा में रहने वाली एक गृहिणी अनुदीप कौर गोराया ने कहा, ”ईंधन की कीमतों में प्रतिदिन की वृद्धि ने हमारे रोज़मर्रा के जीवन को मुश्किल बना दिया है। रसोई गैस के एक सिलिंडर की कीमत लगभग एक हजार रुपए है और फल, सब्ज़ियों, खाना पकाने वाले तेल समेत कई वस्तुओं की कीमतों में भी तेज़ी से वृद्धि हुई है।”

हरियाणा के एक जिले हिसार हड़ताल मूल्य में ऑटो मार्केट में दुकान चलाने वाले व्यवसायी ओमपाल सिंह ने कहा , ”बढ़ती महंगाई ने हड़ताल मूल्य न केवल बड़े बल्कि छोटे व्यापारियों और व्यवसायियों को भी प्रभावित किया है। फिर चाहे वह मध्य प्रदेश में दूध बेचने वाला हो या फिर केरल का मछली विक्रेता।”

भोपाल के एक दूध विक्रेता कल्लू राम (50) ने कहा कि ‘कीमतों में वृद्धि से उनकी बचत हड़ताल मूल्य पर सेंध लगी है। उन्होंने कहा ‘‘मैं अपने ग्राहकों को बाइक से दूध पहुंचाने जाता हूं। कुछ महीने पहले मैं पेट्रोल पर केवल 100 रुपए प्रतिदिन खर्च करता था, जबकि आज यह खर्च बढ़ कर 160 रुपए प्रतिदिन तक पहुंच गया है। मैं चाहता हूं कि पेट्रोल के दाम कम हों।”

चंडीगढ़ के एक सेवानिवृत्त सरकारी कर्मचारी बलदेव चंद ने कहा कि महंगाई ने उनके घर के बजट को बहुत प्रभावित किया है। वे कहते हैं ‘‘ मेरी पेंशन एक अच्छा हिस्सा पहले ही मेरी और मेरी पत्नी द्वारा ली जाने वाली दवाईयों पर खर्च हो रहा था। आवश्यक वस्तुओं की बढ़ती कीमतों ने हमें सभी गैर-जरूरी खर्चों पर रोक लगाने के लिए मजबूर कर दिया है।”

पिछले एक महीने में सीएनजी की कीमत में हुई 10 रुपये प्रति किलो की वृद्धि के कारण ऑटो और कैब चालकों ने 18 अप्रैल से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने की धमकी दी है। दिल्ली ऑटो रिक्शा संघ के महासचिव राजेंद्र सोनी ने कहा ”सीएनजी अब 69 रुपये प्रति किलोग्राम से अधिक दर पर मिल रही है। हम सरकार से सीएनजी पर 35 रुप‍ये प्रति किलोग्राम की दर से सब्सिडी देने की मांग करते हैं ताकि हम जि़ंदा रह सकें। अगर हमारी मांगें पूरी नहीं की गईं तो हम 18 अप्रैल से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले जाएंगे।”

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के बाज़ार में सब्ज़ी बेचने वाली कामिनी पटेल का कहना है कि ईंधन की कीमतों में वृद्धि से ग्राहक और विक्रेता दोनों प्रभावित हुए हैं। कामिनी ने कहा ‘‘पहले मैं रोज़ाना 1500 रुपये तक कमा लेती थी लेकिन अब आमदनी 1000 रुपये से भी नीचे आ गई है। लोग महंगी सब्जि़यां खरीदने से कतरा रहे हैं।”

कोविड-19 महामारी के कारण घाटे में चल रहे होटल और रेस्तरां मालिकों का कहना है कि गैस सिलिंडर और हड़ताल मूल्य अन्य वस्तुओं की कीमतों में हुई वृद्धि ने कोविड महामारी के बाद व्यापार को एक ओर झटका दिया है।

होटल और रेस्टोरेंट एसोसिएशन ऑफ ईस्टर्न इंडिया के अध्यक्ष सुदेश कुमार पोद्दर का कहना है ”एलपीजी के वाणिज्यिक सिलिंडर की कीमतों के साथ-साथ सभी आवश्यक वस्तुओं की कुल दरों में 20 प्रतिशत तक की वृद्धि हुई है। ग्राहकों को खोने के डर से रेस्टोरेंट अपनी वस्तुओं के दाम बढ़ाने में असमर्थ हैं, लेकिन खर्च निकालना भी मुश्किल हो रहा है।”

मुबंई में रहने वाले एक वित्तीय सलाहकार दीपक सहिजवाला ने कहा ” जब तक यूक्रेन संकट जारी रहेगा, ईंधन की कीमतों में वृद्धि होती रहेगी। भारत के लिए उच्च मुद्रास्फीति चिंता का विषय है। सरकार के पास एकमात्र उपाय है कि वह ईंधन को जीएसटी के दायरे में लेकर आये। इससे खुदरा स्तर पर कीमतों में काफी कमी आएगी।”

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

हड़ताल मूल्य

केंद्रीय बजट में शुल्क में बदलाव और उसके बाद सराफों की राष्ट्रव्यापी हड़ताल से इस मूल्य शृंखला में कारोबार गतिविधियां थम गई हैं। हड़ताल के बाद रिफाइंड सोने की कम मांग है। इसके अलावा बजट में शुल्क में बदलाव से रिफाइनिंग मुनाफे का कारोबार नहीं रह गया है। वित्त मंत्री ने गोल्ड डोर (अद्र्ध-शुद्ध सोने) पर काउंटरवेलिंग ड्यूटी (सीवीडी) 8 फीसदी से बढ़ाकर 8.75 फीसदी करने का प्रस्ताव रखा था। वहीं डोर से बने रिफाइंड सोने पर उत्पाद शुल्क 9 फीसदी से बढ़ाकर 9.5 फीसदी किया गया था। कारोबारियों का कहना है कि इससे रिफाइनरों को 0.5 फीसदी से अधिक मार्जिन नहीं मिलेगा। उत्तराखंड जैसे उत्पाद शुल्क मुक्त क्षेत्रों में मार्जिन घटकर 1.25 फीसदी पर आ जाएगा, जो पहले 2 फीसदी था।

लंदन बुलियन मार्केट एसोसिएशन द्वारा मान्यता प्राप्त देश की एकमात्र रिफाइनरी एमएमटीसी-पंप्स के प्रबंध निदेशक राजेश खोसला का सुझाव है कि डोर पर सीवीडी बढ़ाकर 9 फीसदी हड़ताल मूल्य और रिफाइंड बार पर सीवीडी 9.25 फीसदी की जाए। उन्होंने कहा, 'इससे उत्पाद शुल्क चुकाने और उत्पाद शुल्क मुक्त क्षेत्रों की रिफाइनरियों के लिए कारोबार करना फायदेमंद रहेगा।' उन्होंने कहा कि इससे उत्पाद शुल्क चुकाने वाली रिफाइनरियों का मार्जिन बढ़कर 0.78 फीसदी और उत्पाद शुल्क क्षेत्रों की रिफाइनरियों का मार्जिन 1.01 फीसदी हो जाएगा। खोसला ने कहा कि अगर सरकार की स्वर्ण मुद्रीकरण योजना को सफल बनाना है तो सोने की रिफाइनिंग को फायदेमंद बनाए रखना होगा।

अशुद्ध सोने की देश में कम मांग है, इसलिए बाजार कीमत आयात लागत से काफी कम बोली जाती है। इसका मतलब है कि 'अनाधिकारिक आयात' भी थम गया है। जीएफएमएस थॉमसन रॉयटर्स के एक अनुमान के मुताबिक मार्च में सराफोंकी हड़ताल के चलते महज 13 सोने का आयात हुआ, जो 29 महीनों में सबसे कम था। इस सोने में 10 टन फिर से निर्यात के लिए आयात किया गया था, इसलिए डोर का आयात मुश्किल से 2 टन रहा। इस समय दी जा रही छूट 400 रुपये प्रति 10 ग्राम है। अगर आभूषण बनाने के लिए आयात नहीं किया जाता है तो इस स्तर पर सोने के आयात घाटे का सौदा है और इस समय आभूषण विनिर्माण नहीं हो रहा है।

गोला में 6 अगस्त तक रहेगी वकीलों की हड़ताल

ऊपर संपत्तियों में की गई मूल्य वृद्धि को लेकर सेंट्रल बार एसोसिएशन की हड़ताल 6 अगस्त तक बढ़ा दी गई.

गोला में 6 अगस्त तक रहेगी वकीलों की हड़ताल

गोला गोकर्ण नाथ, संवाददाता।

ऊपर संपत्तियों में की गई मूल्य वृद्धि को लेकर सेंट्रल बार एसोसिएशन की हड़ताल 6 अगस्त तक बढ़ा दी गई है।

गुरुवार को एसोसिएशन के महामंत्री विजय कुमार वर्मा की अध्यक्षता में बैठक हुई। जिसमें कहा गया कि जिले के वकील एक अगस्त से परिसंपत्तियों में मूल्य वृद्धि को लेकर हड़ताल पर हैं। गोला में भी हड़ताल 1 अगस्त से 3 अगस्त तक की गई थी, फिर भी जिला प्रशासन द्वारा इस पर कोई निर्णय नहीं लिया गया है। जिसे लेकर तय किया गया है कि यह हड़ताल उप निबंधक कार्यालय के अलावा तहसील के सभी न्यायलयों में प्रस्ताव भेजकर हड़ताल कर दी गई है। बैठक में एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष लाल बिहारी वर्मा, प्रदीप सिंह काजल, नरेंद्र कुमार शुक्ला, विजय प्रकाश वर्मा, जय गोविंद राठौर, अवनीश वर्मा, राकेश वर्मा, अनवारूल हक, विमल श्रीवास्तव और तेज राम समेत कई अन्य वकील शामिल थे।

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कर योग्य प्रतिभूति लेनदेन का मूल्य.

99. कर योग्य प्रतिभूति लेनदेन के मूल्य -

14 [(एक) प्रतिभूतियों में एक विकल्प से संबंधित एक कर योग्य प्रतिभूति लेनदेन के मामले में, होंगें
(i) खंड 98 में टेबल के सीरियल नंबर 4 के मद (क) में लेन - देन के संबंध में विकल्प प्रीमियम,;
(ii) निपटान खंड 98 में टेबल के सीरियल नंबर 4 के मद में लेन - देन के संबंध में कीमत, (ख);]
(ख) "वायदा" किया जा रहा है, एक व्युत्पन्न से संबंधित एक कर योग्य प्रतिभूति लेनदेन के मामले में, इस तरह के "हड़ताल मूल्य वायदा" कारोबार कर रहा है, जिस पर कीमत होगी; और
(ग) किसी भी अन्य कर योग्य प्रतिभूति लेनदेन के मामले में, ऐसी प्रतिभूतियों खरीदा या बेचा जाता है, जिस पर कीमत होगी:

बशर्ते कि बोर्ड सकता, कर योग्य प्रतिभूतियों के लेनदेन किसी मान्यता प्राप्त स्टॉक एक्सचेंज या, नियमों से, निर्दिष्ट ऐसी प्रतिभूतियों की कीमत का निर्धारण करने के प्रयोजनों के लिए प्रासंगिक हो सकता है, जो इस तरह के अन्य कारकों में बसे हुए हैं जिस तरीके को ध्यान में रखते हुए 15 यह द्वारा बनाई गई इस खंड के प्रयोजनों के लिए इस तरह की प्रतिभूतियों की कीमत निर्धारित करने की विधि.

प्र.14. वित्त अधिनियम, 2008 से प्रभावी द्वारा प्रतिस्थापित 2008/01/06. : पहले अपने प्रतिस्थापन के लिए, खंड (क) के तहत के रूप में पढ़ा

'(एक) एक योग्य प्रतिभूतियों के लेनदेन के मामले में "प्रतिभूतियों में विकल्प" किया जा रहा है, एक व्युत्पन्न से संबंधित, हड़ताल कीमत की कुल और इस तरह के "प्रतिभूतियों में विकल्प" का विकल्प प्रीमियम होगा;'

प्र.15. नियम 3 और प्रतिभूति लेनदेन कर नियम, 2004 के 4 देखें.

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